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45551चखुलि प्रधान! (गढ़वाल ी नाटक)

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  • Bhishma Kukreti
    May 17, 2017

      चखुलि प्रधान!

      (गढ़वाली नाटक)

       

      नाटककार: सुरेश नौटियाल

      Garhwali Play by Suresh Nautiyal

      नाटक के बारे में

      चखुलि प्रधानगढ़वाली नाटक उत्तराखंड की वर्तमान राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों और समस्याओं का अवलोकन करते हुए टिप्पणी करने का एक छोटा सा प्रयास है. नाटक में जो समय दिखाया गया है वह है 9 नवंबर 2032, अर्थात उत्तराखंड राज्य गठन की बत्तीसवीं वर्षगांठ. भविष्य की तिथि दिखाकर यह कल्पना की गयी है कि 9 नवंबर 2032 तक राज्य की लगभग हर समस्या का समाधान हो चुका होगा और तब लोगों के बड़े वर्ग को इस नाटक के माध्यम से पता चलेगा कि राज्य में 2015-16 के आस-पास किस-किस तरह की समस्याएं उपस्थित थीं. राज्य की वर्तमान विकराल समस्याओं को एक नाटक में समेटना संभव नहीं है, फिर भी प्रयास किया गया कि इन्हें समग्रता से सही, सूक्ष्म रूप में ही सही, प्रस्तुत किया जाए. आप जानते ही हैं कि अपने उत्तराखंड में आजकल प्रधानपति का बड़ा प्रचलन है, इसलिए इस विषय को केंद्र में रखकर अन्य विषयों और मुद्दों पर भी पात्रों के माध्यम से यथोचित टिप्पणियां की गयी हैं.

      उत्तराखंड की वर्तमान परिस्थितियों को मैं स्वयं को एक लेखक, पत्रकार और सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अत्यंत असहज मानता हूं. साथ ही, प्रधानपति की असंवैधानिक और अनैतिक व्यवस्था को महिला सशक्तिकरण में व्यवधान और बेसुरे राग की तरह देखता हूं. नाटक में यह दिखाने का प्रयास किया गया है जो स्त्री ग्राम प्रधान बनने से पहले तक किसी भी साधारण स्त्री की तरह थी, वह अवसर मिलते ही अपने व्यक्तित्व की पूर्णता की ओर बढ़ती है. यह कोई चमत्कार नहीं है कि नाटक की मुख्यपात्र चखुलीदेवी अचानक एक सक्षम, बुद्धिमान और दार्शनिक और नेतृत्व प्रदान करने वाली महिला बन