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Re: [fukuoka_farming] translation : NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER (sumant.jo@gmail.com)

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  • Sumant Joshi
    आश्चर्य है के वैज्ञानिक बिना जुताई खेती का प्रचार कर रहे थे !!
    Message 1 of 4 , Dec 14, 2011
    • 0 Attachment
      आश्चर्य है के वैज्ञानिक बिना जुताई खेती का प्रचार कर रहे थे !! चलो इसका मतलब है के अच्छे वैज्ञानिक भी हैं इस दुनिया मे। 

      :)) 



      Sent from my BSNL landline B-fone


      Warm regards,

      Sumant Joshi
      Tel - 09370010424, 0253-2361161
      my little documentary here
      The story of Alandya Dongar
      http://vimeo.com/24027205



      >________________________________
      > From: Raju Titus <rajuktitus@...>
      >To: fukuoka_farming@yahoogroups.com
      >Sent: Thursday, 15 December 2011 8:31 AM
      >Subject: Re: [fukuoka_farming] translation : NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER (sumant.jo@...)
      >
      >

      >प्रिय सुमंतजी,
      >बहुत बहुत धन्यवाद आपने बड़ी जल्दी अनुवाद भेज दिया. ये बहुत अच्छी कार्य शाला
      >रही. किसानो ने भी समझने में बहुत सहयोग दिया. आखरी दिन एक स्थानीय वैज्ञानिक
      >भी आ गए थे जो बिना जुताई की खेती का प्रचार और प्रसार कर रहे हैं. इस से इस
      >कार्यशाला को काफी मदद भी मिली.
      >धन्यवाद
      >राजू
      >
      >2011/12/14 Sumant Joshi <sumant_jo@...>
      >
      >> **
      >>
      >>
      >> Natural farming workshop
      >> 10-12 Dec 2011, Kanalsi Village, Yamunanagar, Haryana
      >> Organized by Peace organization New Delhi
      >> Faculty: Mr Raju Titus, Hoshngabad
      >> Attended by: Friends of rivers, about 60 people
      >> Mr Manoj was the main organizer of this workshop. He is a retired Forest
      >> officer and a keen environmentalist. His organization is called 'Peace'. He
      >> is working hard to save the Yamuna river in Haryana. He has therefore
      >> organized clubs of friends of rivers which are active in many parts of
      >> Haryana. It is these friends who organizaed this workshop.
      >> The main thought behind it was that the river is born and fed by the
      >> environment around it. The environment which has farms which use tilling
      >> methods detrimental to her health. This is causing water levels to drop
      >> rapidly in wells, rivers and other water bodies. Where water was easily
      >> found just 6 feet below ground, today it is not found even in deep
      >> borewells. Where it is found, huge amounts of electricity or fuesl is
      >> needed to get it. This extra expenditure is making farmers poor. no water
      >> means no farming. Most people think that by just making a few small dams or
      >> ponds you can retrieve the situation. But farming based on tilling neds
      >> increasing water which cannot be sustainably provided.
      >> Natural farming, on the other hand, causes water to be abrorbed by the
      >> soil. This causes the water table to rise incrementally. Water requirements
      >> by the farm keeps reducing too.
      >> NF causes vegetative matter to keep increasing in the soil which enriches
      >> it and improves productivity and quality of crop. Recurring expenditure
      >> also reduces by as much as 80%.
      >> These points were discussed for three days. Farmers appreciated this very
      >> much and resolved to do something about it. The farmers of the village
      >> where the workshop was organized raise trees and normal crops. They are
      >> therefore wise and prosperous. There is no doubt that they can easily
      >> effect changes and help save the Yamuna river. On the last day the
      >> discussion centered on who would do what. Many of them decided to start NF.
      >> At the end of the workshop little kids seemed to take far greater interest
      >> in the idea and participated in making seed balls. You can obtain the full
      >> report from Mr Manoj here: yamunajiye@...
      >>
      >> (The mail id yamunajiye or 'yamuna jiye' means long live the Yamuna)
      >>
      >> Sent from my BSNL landline B-fone
      >>
      >> Warm regards,
      >>
      >> Sumant Joshi
      >> Tel - 09370010424, 0253-2361161
      >> my little documentary here
      >> The story of Alandya Dongar
      >> http://vimeo.com/24027205
      >>
      >> >________________________________
      >> > From: Raju Titus (Google Docs) <rajuktitus@...>
      >> >To: sumant.jo@...
      >> >Sent: Wednesday, 14 December 2011 7:44 PM
      >> >Subject: NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER (
      >> sumant.jo@...)
      >> >
      >> >
      >> > I've shared NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER
      >> >Click to open:
      >> > * NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER
      >> >
      >> >NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER
      >> >कुदरती खेती कार्यशाला
      >> >१०,११,१२ दिसम्बर कनालसी गाँव यमुनानगर हरियाणा
      >> >आयोजक पीस संस्था दिल्ली
      >> >द्वारा -राजू टाइटस कुदरती खेती के किसान ,होशंगाबाद,म.प्र.
      >> >उपस्थित- नदी मित्र मंडलियाँ (किसान) ६० से अधिक
      >> > श्री मनोज जी इस कार्यशाला के मुख्य स्रोत हैं. वे IFS सेवानिवृत हैं.
      >> तथा पर्यावरण के जानकार हैं .अनेक वर्ष उन्होंने सरकारी वन विभाग में सेवाएं
      >> दी हैं. उनकी संस्था का नाम पीस है. वे हरियाणा में यमुना को बचाने के लिए काम
      >> करते हैं. इसी लिए उन्होंने नदी मित्रों की मंडलियाँ बनाई हैं जो अनेक
      >> प्रदेशों में काम कर रही हैं. इन्ही मित्रों के साथ मिलकर ये कार्य शाला
      >> आयोजित की गयी थी.
      >> > इस में सोच ये है की नदियों का जन्म और उनका पोषण आसपास के पर्यावरण से
      >> होता है जिस में अधिकतर जुताई आधारित खेत हैं जो इस में बाधक हैं. इस लिए
      >> भूमिगत जल,कुओं नालो और नदियों में जल का स्तर तेजी से गिर रहा है. जहाँ दो
      >> हाथ पर पानी मिल जाया करता था वहां अब बोर करने की मशीनों से भी पानी नहीं मिल
      >> रहा है. मिल भी रहा है तो उसे पाने के लिए बहुत बिजली या तेल की जरुरत है.
      >> अधिक लागत के कारण
      >> किसान गरीब हो रहे हैं. खेती पानी के बिना संभव नहीं है. खेतों में पानी नहीं
      >> तो खाद भी नहीं और फसल भी नहीं. अधिकतर लोग सोचते हैं की छोटे बड़े बांध बना
      >> कर, तालाब बनाकर हम पानी को बचा सकते हैं. किन्तु जुताई कर के खेती करने से
      >> पानी की मांग बढ़ते क्रम में रहती है. जिसे टिकाऊ तरीके से पूरा करना ना
      >> मुमकिन है.
      >> > कुदरती खेती जुताई के बिना की जाती है जिस से बरसात का पानी खेतों के
      >> द्वारा सोख लिया जाता है. जिस से लगातार भूमिगत जल का स्तर बढ़ता जाता है.पानी
      >> की मांग घटते क्रम रहती है जिसे आसानी से छोड़ा जा सकता है. खेतों का ये पानी
      >> फसलों के अलावा कुए,नदी के जल की आपूर्ति करता है वही ये बरसात भी करवाता है.
      >> > बिना जुताई किये खेती करने से खेतों की ऊपरी सतह पर जमा खाद खेतों
      >> में ही जमा होती रहती है तथा हम खेती के अवशेषों को जहाँ से लेते हैं वहीँ
      >> छोड़ देते हैं जिस से खेत ताकतवर हो जाते हैं जिस से गुणवत्ता और उत्पादन
      >> दोनों बढ़ते क्रम में मिलते हैं. खेती की लागत में ८०% खर्च कम आता है.
      >> > पूरे तीन दिन इसी विषय पर चर्चा रही. जिसे अनेक किसानो ने बहुत सराहा
      >> तथा अनेक किसानो ने इसे करने का संकल्प लिए. जिस गाँव में ये कार्य शाला
      >> आयोजित की गयी थी उस में किसान पेडों के साथ अनाज की भी खेती करते हैं. इस लिए
      >> वे समझदार और धनि हैं. जो परिवर्तन कर आसानी से यमुना नदी को बचाने में सहयोग
      >> प्रदान करेंगे इस में कोई दो राय नहीं है. आखरी दिन इस बात की चर्चा रही की
      >> कौन कहाँ और
      >> कैसे इस खेती को करेगा. अनेक किसानो ने खेती को करने का संकल्प लिया. इस
      >> कार्य शाला के अंत में छोटे बच्चों के साथ चर्चा की गयी जिस में उन्होंने बड़े
      >> किसानो से कहीं अधिक रूचि दिखाई और जब उन से पूछा गया की आप कुदरती खेती कर
      >> सकते हो तो उन्होंने कहाँ हम कर सकते हैं. और वे तुरंत बीज गोलिओं को बनाने
      >> लगे.
      >> > पूरी रिपोर्ट श्री मनोज मिश्रा yamunajiye@... से प्राप्त
      >> की जा सकती है.
      >> >Google Docs makes it easy to create, store and share online documents,
      >> spreadsheets and presentations.
      >> >
      >> >
      >>
      >> [Non-text portions of this message have been removed]
      >>
      >>
      >>
      >
      >--
      >Raju Titus. Hoshangabad. 461001.India.
      >+919179738049.
      >http://picasaweb.google.com/rajuktitus
      >fukuoka_farming yahoogroup
      >
      >[Non-text portions of this message have been removed]
      >
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    • Raju Titus
      हम किसी भी वैज्ञानिक को बुरा नहीं कहते किन्तु जो सच बोले और
      Message 2 of 4 , Dec 16, 2011
      • 0 Attachment
        हम किसी भी वैज्ञानिक को बुरा नहीं कहते किन्तु जो सच बोले और अहिसा का साथ दे
        वो निश्चित अच्छा ही है. फुकुओकाजी भी एक वैज्ञानिक थे किन्तु उन्होंने अपने
        ज्ञान को बाँटकर पूरे संसार को एक अद्भुत कुदरती ज्ञान दिया जिस से फ़िर जीने
        की तमन्ना जगी है. अन्यथा सब तरफ अँधेरा ही अँधेरा था.

        2011/12/15 Sumant Joshi <sumant_jo@...>

        > **
        >
        >
        > आश्चर्य है के वैज्ञानिक बिना जुताई खेती का प्रचार कर रहे थे !! चलो इसका
        > मतलब है के अच्छे वैज्ञानिक भी हैं इस दुनिया मे।
        >
        > :))
        >
        >
        > Sent from my BSNL landline B-fone
        >
        > Warm regards,
        >
        > Sumant Joshi
        > Tel - 09370010424, 0253-2361161
        > my little documentary here
        > The story of Alandya Dongar
        > http://vimeo.com/24027205
        >
        > >________________________________
        > > From: Raju Titus <rajuktitus@...>
        > >To: fukuoka_farming@yahoogroups.com
        > >Sent: Thursday, 15 December 2011 8:31 AM
        > >Subject: Re: [fukuoka_farming] translation : NATURAL FARMING WORKSHOP
        > KANALSI VILAGE YAMUNANAGER (sumant.jo@...)
        >
        > >
        > >
        > >
        > >प्रिय सुमंतजी,
        > >बहुत बहुत धन्यवाद आपने बड़ी जल्दी अनुवाद भेज दिया. ये बहुत अच्छी कार्य
        > शाला
        > >रही. किसानो ने भी समझने में बहुत सहयोग दिया. आखरी दिन एक स्थानीय वैज्ञानिक
        > >भी आ गए थे जो बिना जुताई की खेती का प्रचार और प्रसार कर रहे हैं. इस से इस
        > >कार्यशाला को काफी मदद भी मिली.
        > >धन्यवाद
        > >राजू
        > >
        > >2011/12/14 Sumant Joshi <sumant_jo@...>
        > >
        > >> **
        >
        > >>
        > >>
        > >> Natural farming workshop
        > >> 10-12 Dec 2011, Kanalsi Village, Yamunanagar, Haryana
        > >> Organized by Peace organization New Delhi
        > >> Faculty: Mr Raju Titus, Hoshngabad
        > >> Attended by: Friends of rivers, about 60 people
        > >> Mr Manoj was the main organizer of this workshop. He is a retired Forest
        > >> officer and a keen environmentalist. His organization is called
        > 'Peace'. He
        > >> is working hard to save the Yamuna river in Haryana. He has therefore
        > >> organized clubs of friends of rivers which are active in many parts of
        > >> Haryana. It is these friends who organizaed this workshop.
        > >> The main thought behind it was that the river is born and fed by the
        > >> environment around it. The environment which has farms which use tilling
        > >> methods detrimental to her health. This is causing water levels to drop
        > >> rapidly in wells, rivers and other water bodies. Where water was easily
        > >> found just 6 feet below ground, today it is not found even in deep
        > >> borewells. Where it is found, huge amounts of electricity or fuesl is
        > >> needed to get it. This extra expenditure is making farmers poor. no
        > water
        > >> means no farming. Most people think that by just making a few small
        > dams or
        > >> ponds you can retrieve the situation. But farming based on tilling neds
        > >> increasing water which cannot be sustainably provided.
        > >> Natural farming, on the other hand, causes water to be abrorbed by the
        > >> soil. This causes the water table to rise incrementally. Water
        > requirements
        > >> by the farm keeps reducing too.
        > >> NF causes vegetative matter to keep increasing in the soil which
        > enriches
        > >> it and improves productivity and quality of crop. Recurring expenditure
        > >> also reduces by as much as 80%.
        > >> These points were discussed for three days. Farmers appreciated this
        > very
        > >> much and resolved to do something about it. The farmers of the village
        > >> where the workshop was organized raise trees and normal crops. They are
        > >> therefore wise and prosperous. There is no doubt that they can easily
        > >> effect changes and help save the Yamuna river. On the last day the
        > >> discussion centered on who would do what. Many of them decided to start
        > NF.
        > >> At the end of the workshop little kids seemed to take far greater
        > interest
        > >> in the idea and participated in making seed balls. You can obtain the
        > full
        > >> report from Mr Manoj here: yamunajiye@...
        > >>
        > >> (The mail id yamunajiye or 'yamuna jiye' means long live the Yamuna)
        > >>
        > >> Sent from my BSNL landline B-fone
        > >>
        > >> Warm regards,
        > >>
        > >> Sumant Joshi
        > >> Tel - 09370010424, 0253-2361161
        > >> my little documentary here
        > >> The story of Alandya Dongar
        > >> http://vimeo.com/24027205
        > >>
        > >> >________________________________
        > >> > From: Raju Titus (Google Docs) <rajuktitus@...>
        > >> >To: sumant.jo@...
        > >> >Sent: Wednesday, 14 December 2011 7:44 PM
        > >> >Subject: NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER (
        > >> sumant.jo@...)
        > >> >
        > >> >
        > >> > I've shared NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER
        > >> >Click to open:
        > >> > * NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER
        > >> >
        > >> >NATURAL FARMING WORKSHOP KANALSI VILAGE YAMUNANAGER
        > >> >कुदरती खेती कार्यशाला
        > >> >१०,११,१२ दिसम्बर कनालसी गाँव यमुनानगर हरियाणा
        > >> >आयोजक पीस संस्था दिल्ली
        > >> >द्वारा -राजू टाइटस कुदरती खेती के किसान ,होशंगाबाद,म.प्र.
        > >> >उपस्थित- नदी मित्र मंडलियाँ (किसान) ६० से अधिक
        > >> > श्री मनोज जी इस कार्यशाला के मुख्य स्रोत हैं. वे IFS सेवानिवृत हैं.
        > >> तथा पर्यावरण के जानकार हैं .अनेक वर्ष उन्होंने सरकारी वन विभाग में
        > सेवाएं
        > >> दी हैं. उनकी संस्था का नाम पीस है. वे हरियाणा में यमुना को बचाने के लिए
        > काम
        > >> करते हैं. इसी लिए उन्होंने नदी मित्रों की मंडलियाँ बनाई हैं जो अनेक
        > >> प्रदेशों में काम कर रही हैं. इन्ही मित्रों के साथ मिलकर ये कार्य शाला
        > >> आयोजित की गयी थी.
        > >> > इस में सोच ये है की नदियों का जन्म और उनका पोषण आसपास के पर्यावरण से
        > >> होता है जिस में अधिकतर जुताई आधारित खेत हैं जो इस में बाधक हैं. इस लिए
        > >> भूमिगत जल,कुओं नालो और नदियों में जल का स्तर तेजी से गिर रहा है. जहाँ दो
        > >> हाथ पर पानी मिल जाया करता था वहां अब बोर करने की मशीनों से भी पानी नहीं
        > मिल
        > >> रहा है. मिल भी रहा है तो उसे पाने के लिए बहुत बिजली या तेल की जरुरत है.
        > >> अधिक लागत के कारण
        > >> किसान गरीब हो रहे हैं. खेती पानी के बिना संभव नहीं है. खेतों में पानी
        > नहीं
        > >> तो खाद भी नहीं और फसल भी नहीं. अधिकतर लोग सोचते हैं की छोटे बड़े बांध
        > बना
        > >> कर, तालाब बनाकर हम पानी को बचा सकते हैं. किन्तु जुताई कर के खेती करने से
        > >> पानी की मांग बढ़ते क्रम में रहती है. जिसे टिकाऊ तरीके से पूरा करना ना
        > >> मुमकिन है.
        > >> > कुदरती खेती जुताई के बिना की जाती है जिस से बरसात का पानी खेतों के
        > >> द्वारा सोख लिया जाता है. जिस से लगातार भूमिगत जल का स्तर बढ़ता जाता
        > है.पानी
        > >> की मांग घटते क्रम रहती है जिसे आसानी से छोड़ा जा सकता है. खेतों का ये
        > पानी
        > >> फसलों के अलावा कुए,नदी के जल की आपूर्ति करता है वही ये बरसात भी करवाता
        > है.
        > >> > बिना जुताई किये खेती करने से खेतों की ऊपरी सतह पर जमा खाद खेतों
        > >> में ही जमा होती रहती है तथा हम खेती के अवशेषों को जहाँ से लेते हैं वहीँ
        > >> छोड़ देते हैं जिस से खेत ताकतवर हो जाते हैं जिस से गुणवत्ता और उत्पादन
        > >> दोनों बढ़ते क्रम में मिलते हैं. खेती की लागत में ८०% खर्च कम आता है.
        > >> > पूरे तीन दिन इसी विषय पर चर्चा रही. जिसे अनेक किसानो ने बहुत सराहा
        > >> तथा अनेक किसानो ने इसे करने का संकल्प लिए. जिस गाँव में ये कार्य शाला
        > >> आयोजित की गयी थी उस में किसान पेडों के साथ अनाज की भी खेती करते हैं. इस
        > लिए
        > >> वे समझदार और धनि हैं. जो परिवर्तन कर आसानी से यमुना नदी को बचाने में
        > सहयोग
        > >> प्रदान करेंगे इस में कोई दो राय नहीं है. आखरी दिन इस बात की चर्चा रही की
        > >> कौन कहाँ और
        > >> कैसे इस खेती को करेगा. अनेक किसानो ने खेती को करने का संकल्प लिया. इस
        > >> कार्य शाला के अंत में छोटे बच्चों के साथ चर्चा की गयी जिस में उन्होंने
        > बड़े
        > >> किसानो से कहीं अधिक रूचि दिखाई और जब उन से पूछा गया की आप कुदरती खेती कर
        > >> सकते हो तो उन्होंने कहाँ हम कर सकते हैं. और वे तुरंत बीज गोलिओं को बनाने
        > >> लगे.
        > >> > पूरी रिपोर्ट श्री मनोज मिश्रा yamunajiye@... से प्राप्त
        > >> की जा सकती है.
        > >> >Google Docs makes it easy to create, store and share online documents,
        > >> spreadsheets and presentations.
        > >> >
        > >> >
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        > >--
        > >Raju Titus. Hoshangabad. 461001.India.
        > >+919179738049.
        > >http://picasaweb.google.com/rajuktitus
        > >fukuoka_farming yahoogroup
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        >
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        Raju Titus. Hoshangabad. 461001.India.
        +919179738049.
        http://picasaweb.google.com/rajuktitus
        fukuoka_farming yahoogroup


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