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translation: Cobra, wildcat and me. कोब रा, बिल्ली और मैं !

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  • Sumant Joshi
    Once my buffalo named Bhuri had gone to the soo babool farm for feeding. As usual her calf Salma was waiting at home. The buffalo is normally tied to a long
    Message 1 of 1 , Sep 18, 2010
      Once my buffalo named Bhuri had gone to the soo babool farm for feeding. As usual her calf Salma was waiting at home. The buffalo is normally tied to a long rope near the tree and fed soo babool leaves. But she happened to get her foot entwined in the rope and fell in sua\ch an awkward fashion that she couldn't get up on her own. Consequently she couldn't come home that night. It was dask, when cattle are supposed to come home and the calf Salma was very hungry and crying for milk. I was with her sitting on my haunches trying to feed her milk we had in the house using a small vessel and my fingers. To avoid Salma getting too agitated I switched off the torch.Suddenly I heard a sound like a cobra's hiss. I quickly switched on the torch and found a wild cat sitting right in front of me. I assumed that there were two cats and they were fighting. A cat's hiss is quite similar to that of a cobra's. Our natural farms have lots of such wild creatures like
      peacocks, mongoose, wild cats and snakes roaming around freely. I think maybe it causes a kind of natural balance to be achieved.The next hiss was right next to my ear. I again switched the torch on and found a cobra's hood right next to my ear. The moment I looked into his eyes, I realized that he was scared of the cat and was trying to hide behind me. He was hissing and asking me for help. I quietly started shooing the cat off without alarming the cobra. As the cat started going back, the cobra too lowered it's hood and started backing off. He kept looking back at me and the cat repeatedly and finally slithered off into the dark. Afterwards I was wondering as to why I wasn't afraid of the snake at all. If I had reacted out of fear he probably would have bitten me. Before getting into natural farming, I used to kill snakes on sight never once considering them as a friend. That cobra opened my eyes. If he had considered me an enemy I would not have
      survived that day.
      Raju Titus
      Sent from my BSNL landline B-fone

      Warm regards,

      Sumant Joshi
      Tel - 09370010424, 0253-2361161

      --- On Sat, 18/9/10, sumant joshi <sumant.jo@...> wrote:

      From: sumant joshi <sumant.jo@...>
      Subject: Fwd: कोबरा, बिल्ली और मैं !
      To: sumant_jo@...
      Date: Saturday, 18 September, 2010, 9:56 PM



      ---------- Forwarded message ----------
      From: Raju Titus <rajuktitus@...>

      Date: 2010/9/15
      Subject: कोबरा, बिल्ली और मैं !
      To: ofai north <ofai.north@...>, nidhi ram <nidhi24r@...>, nitin lall <nitinw_lal@...>, NEERU <neerjamallick@...>, ranu titus <ranu.titus@...>, "Thakurta, Nitin" <Nitin.Thakurta@...>, "W.T.Lal" <cpschindwara@...>, "Yugandhar S." <s.yugandhar@...>, BUTU <sakar_thakur2000@...>, Shammi Nanda <shammi_nanda@...>, "SHASI P.KUMAR" <shashi.pkumar@...>, Sonal <brownsonal@...>, seemanth2000@..., sumant joshi <sumant.jo@...>, Sushil Badani <sushil.badani@...>, surendra brown <brownsurendra@...>, dishasamvad <dishasamvad@...>, ARUN DIKE <arun_dike@...>, dineshkothari1@..., "R.N.Berwa" <rnberwa@...>, Prabhaker Pandit <pprabhakar2@...>, PATANJALI <patanjalishivam@...>, Prabhat Menon <menonprabhat@...>, Ronald Titus <titron7@...>, johnronald34@...





      कोबरा, बिल्ली और मैं !




         एक दिन की बात है मेरी भेंस जिसका नाम भूरी है हमारे
      सुबबूल के कुदरती खेतों में चरने के लिए गयी थी,  उसकी पड़िया ( भेंस की बच्ची) जिसका नाम सलमा है हमेशा
      की तरह घर मे अपनी माँ  का
      इंतजार कर रही थी. खेतों मे जानवरों को  लम्बी रस्सी से बांधना पड़ता है. उन्हें सुबबूल के
      पेड़ों से पत्तियों को काट काट कर  खिलाया जाता है. असावधानी के कारण उसकी टांग रस्सी
      मे उलझ गयी थी जिस से वह ऐसी गिरी की उस से उठते ही नहीं बना. इस कारण वो उस रात
      घर नहीं आ सकी.

        गो धूलि का
      समय था. सार (जानवरों को बांधने की जगह) में अँधेरा था. सलमा को दूध नहीं मिलने से वो
      बहुत रो रही थी, और मैं उसे
      उपरी दूध पिलाने की कोशिश कर रहा था. मैं उखरू बैठ कर कटोरे से उन्ग्लिओं के
      सहारे दूध पिलाने लगा. सलमा विचलित न हो जाये इस लिए मैने टोर्च को बुझाकर नीचे रख
      दिया था.


          इसी बीच मुझे सांप के फुफकारने की आवाज आई. मैने टोर्च
      को जला कर देखा तो सामने मुंडेर पर जंगली बिल्ली बैठी  थी. मैने सोचा एक और बिल्ली होगी और वे लड़
      रही होंगी. उनकी आवाज भी सांप के फुफकारने जैसी रहती है. हमारे कुदरती खेतों में सांप, जंगली बिल्लियाँ, नेवले ,मोर आदि यहाँ वहां घूमते रहते हैं. इनके
      कारण अपने आप एक कुदरती संतुलन बना रहता है.


           अबकी बार ये फुफकारने की आवाज बिलकुल मेरे
      कान के पास सुनाई दी. मैने पुन: टॉर्च को जला दिया. और पलट कर देखने लगा. देखा तो
      बिलकुल मेरे कान के पास कोबरे का सिर था. जैसे ही मेरी आंख उस की आँखों से मिली तो
      मुझे महसूस हुआ की वो किसी चीज़ से डर कर मेरे पीछे छुपने की कोशिश कर रहा है. वो
      फुफकार कर मुझ से कहने की कोशिश कर रहा है की मुझे बचाओ. मैने सामने देखा वही
      जंगली बिल्ली थी मेरे कारण वो आगे नहीं बढ़ पा रही थी. मैने धीरे से "हट"
      "हट" करते हुए बिल्ली को भगाने की कोशिश की. वह दो कदम पीछे चली गयी.
      उसके पीछे हटने से कोबरा भी नीचे सिर कर जाने लगा. मैं हट हट करते रहा बिल्ली हटती
      गयी और कोबरा भी जाता रहा, वो मुड़ मुड कर  मुझे और बिल्ली को देखता जा रहा था. और देखते देखते वो
      आँखों से ओझल हो गया.


        उसके जाने के बाद मैने सोचा की आखिर मुझे डर क्यों नहीं लगा ? मुझे डर इस लिए नहीं लगा क्यों की यदि में डर कर ऐसी वैसी हरकत कर देता तो
      वो मुझे  डस सकता था . कुदरती खेती करने से पहले मैं
      साँपों को देख कर सीधे मारने की कोशिश करता था. कभी उनको अपना मित्र नहीं समझता
      था. किन्तु इस कोबरे ने मेरी आंख खोल दी. यदि वो भी मेरी तरह मुझे दुश्मन समझता तो
      में जिन्दा नहीं बच सकता था.


      राजू टाइटस


       


       




      --
      Raju Titus. Hoshangabad.India.
      +919179738049.
      http://picasaweb.google.com/rajuktitus









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