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Re: [fukuoka_farming] WEED

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    Well Said Mr. Raju sir. My sincere salute/ Guna.Srinivas 2010/5/8 Raju Titus ... [Non-text portions of this message have been removed]
    Message 1 of 2 , May 7, 2010
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      Well Said Mr. Raju sir.

      My sincere salute/

      Guna.Srinivas

      2010/5/8 Raju Titus <rajuktitus@...>

      > प्रिय मित्र,
      > कुदरत मे खरपतवार नाम(Weed) की कोई चीज नहीं होती है. ये तो किसान की भ्रान्ति
      > है . वो हजारो साल से से इसे मारने मे लगा है किन्तु ये तो नही वरन अब किसान
      > ही
      > मिटने लगे हैं. क़ुदरत का नियम है की वो हमेशा अपनी धरती को हरयाली से ढँक कर
      > रखना चाहती है किन्तु हम लोग इस ढकाव को रहने नहीं देते हैं..इस लिय हर साल ये
      > कठिन होती जाती है. किसान धरती पर से सब कुछ मिटा कर केवल वही रखना चाहता है
      > जो वो चाहता है इसलिए और जो कुछ भी उसकी फसल के साथ पैदा होता है उसे वो
      > खरपतवार समझ कर मारता रहता है.
      > हम भी कुदरती खेती करने से पहले यही करते रहते थे इस लिए हमारे खेत काँस घास
      > से भर गए थे.जिसकी जड़ें बीस से तीस फीट तक की गहराई तक चली गयीं थी ये घास
      > फूलों और जड़ों की गठान से पनपती हैं.खेती मे की जारही जमीन की जुताई ,चराई,
      > कटाई या जलाने से ये तेजी से पनपती है. हमारे खेतों मे ये इतनी फैल गयी थी
      > की एक इंच जमीन भी नहीं बची थी. हमने इस को मिटने के लिए जितने उपाय अमल मे
      > लाये वे सभी कम नहीं आये वरन ये घास और अधिक फैल गयी. किन्तु जैसे ही हमने
      > जमीन
      > की जुताई बंद कर इस घास मे कुदरती खेती करना शुरू कर दिया ये अपने आप चली गयी.
      > हम इस घास मे बीजों को बिखरा कर इसे काटकर वंही जहाँ का तंहा फैला देते थे.
      > १९८८ मे जब फुकुओकाजी हमारे फार्म पर आये थे उन्होंने इसे बहुत सराहा था.
      > हमारा मानना है की हमें खरपतवार से दोस्ती करना सीखना चाहिए. इस मे ही भलाई
      > है.
      > क़ुदरत मे खरपतवार कुछ नहीं होता है.
      > राजू.
      >
      >
      > Dear friends,
      > In nature, there is no such thing as weed. This is an illusion of the
      > farmer. He kept on killing them(weed) for thousands of years and now he
      > himself is getting killed. Nature's rule is to keep the earth always
      > covered
      > with greenery, but we try to interfere and remove this cover. Due to this
      > they become stronger and stronger each passing year. The farmer wants only
      > those plants to stay which he thinks are beneficial and eliminates every
      > other plant and animal from his farm by thinking of them as weeds and
      > pests.
      > Before I started natural farming, I too tried to eliminate the weeds. This
      > resulted in my farm getting filled with 'kaans' grass. This grass has roots
      > as deep as 20 to 30 feet and it spreads very fast by the medium of
      > flowering
      > and roots. It's spread is hastened by acts such as tilling, grazing,
      > cutting
      > and burning. It spread to every inch of my land. All the methods I tried to
      > control this grass resulted in failure and moreover it strengthened the
      > spread of grass. But, when I stopped tilling my land and started natural
      > farming in my farm, the grass disappeared all by itself over time. I used
      > to
      > broadcast seeds in this grass and then used to cut and leave the grass
      > insitu. When Mr.Fukuoka visited my farm in 1988, he appreciated this act
      > very much. My belief is that we must befriend weeds. There is immense
      > benefit in this and there is no such thing as weed in nature.
      > (Translated by Yugandher)
      >
      > --Raju
      >
      >
      >
      > --
      > Raju Titus. Hoshangabad.India.
      > +919179738049.
      > http://picasaweb.google.com/rajuktitus
      >
      >
      > [Non-text portions of this message have been removed]
      >
      >
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      >
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