Loading ...
Sorry, an error occurred while loading the content.

WEED IS NOT PROBLEM (खरपतवार समस ्या नहीं है.)

Expand Messages
  • Raju Titus
    *खरपतवार समस्या नहीं है.* मित्रो, हमारे एक मित्र है श्री
    Message 1 of 5 , Mar 23, 2010
    • 0 Attachment
      *खरपतवार समस्या नहीं है.*
      मित्रो,
      हमारे एक मित्र है श्री राजेन्द्र सिंह राठौर वो मुझ से आये दिन फोन पर सवाल
      करते रहते हैं. वो जैविक खेती विषय पर काम कर रहे हैं. उन्होंने पुछा की
      क्या जताई नहीं करने से खेत खरपतवारों से नहीं भर जायेंगे ?
      मेने कहा
      कुदरत हमेशा जमीन को हरयाली से ढंकना चाहती है किन्तु हम कटाई,
      जुताई,चराई,खरपतवार नाशकों से और आग लगाकर हरयाली को निरंतर नस्ट करते रहते
      है. इस लिए कुदरत नई नई और अनेक कठिन खरपतवारों को भेजती रहती है. जैसे काँस
      ,गाजरघास आदि.
      यदि हम ये तमाम गेर पर्यवार्नीय कामो को बंद कर खेती करें तो फ़िर खरपतवार
      हमारे मित्र बन जाते हैं और वो अपने आप हमारे रास्ते से हट जाते हैं.
      कुदरती खेती करने से पहले हमारे खेत काँस घास से भर गए थे.
      ये घास जमीन के नीचे ३० फीट तक पहुँच गयी थी. इसकी जड़ों मे हर इंच पर गठन होती
      है और ये हर गठान से पनप जाती है.कोई मशीन या खरपतवारनाशक इस को नस्ट नहीं कर
      सकता है.
      किन्तु जुताई छोड़ने से ये अपने आप चली गई.
      हम आसानी से बिना जुताई करे इसमें खेती करने लगे थे.
      इसलिए हम कहते हैं की हरयाली बचाना है तो बिना जुताई की खेती करना सब से सरल
      उपाय है. हमारे खेत पूरे आज ऊँचे ऊँचे पेडों से भरे हैं. जिनसे हमें सब कुछ मिल
      रहा है.
      धन्यवाद
      राजू

      --
      Raju Titus. Hoshangabad.India.
      +919179738049.
      picasawebalbum.rajuktitus


      [Non-text portions of this message have been removed]
    • İnci Gökmen
      Raju can t read your massage!!! inci 2010/3/24 Raju Titus ... [Non-text portions of this message have been removed]
      Message 2 of 5 , Mar 24, 2010
      • 0 Attachment
        Raju

        can't read your massage!!!
        inci

        2010/3/24 Raju Titus <rajuktitus@...>

        > *खरपतवार समस्या नहीं है.*
        > मित्रो,
        > हमारे एक मित्र है श्री राजेन्द्र सिंह राठौर वो मुझ से आये दिन फोन पर सवाल
        > करते रहते हैं. वो जैविक खेती विषय पर काम कर रहे हैं. उन्होंने पुछा की
        > क्या जताई नहीं करने से खेत खरपतवारों से नहीं भर जायेंगे ?
        > मेने कहा
        > कुदरत हमेशा जमीन को हरयाली से ढंकना चाहती है किन्तु हम कटाई,
        > जुताई,चराई,खरपतवार नाशकों से और आग लगाकर हरयाली को निरंतर नस्ट करते रहते
        > है. इस लिए कुदरत नई नई और अनेक कठिन खरपतवारों को भेजती रहती है. जैसे काँस
        > ,गाजरघास आदि.
        > यदि हम ये तमाम गेर पर्यवार्नीय कामो को बंद कर खेती करें तो फ़िर खरपतवार
        > हमारे मित्र बन जाते हैं और वो अपने आप हमारे रास्ते से हट जाते हैं.
        > कुदरती खेती करने से पहले हमारे खेत काँस घास से भर गए थे.
        > ये घास जमीन के नीचे ३० फीट तक पहुँच गयी थी. इसकी जड़ों मे हर इंच पर गठन
        > होती
        > है और ये हर गठान से पनप जाती है.कोई मशीन या खरपतवारनाशक इस को नस्ट नहीं कर
        > सकता है.
        > किन्तु जुताई छोड़ने से ये अपने आप चली गई.
        > हम आसानी से बिना जुताई करे इसमें खेती करने लगे थे.
        > इसलिए हम कहते हैं की हरयाली बचाना है तो बिना जुताई की खेती करना सब से सरल
        > उपाय है. हमारे खेत पूरे आज ऊँचे ऊँचे पेडों से भरे हैं. जिनसे हमें सब कुछ
        > मिल
        > रहा है.
        > धन्यवाद
        > राजू
        >
        > --
        > Raju Titus. Hoshangabad.India.
        > +919179738049.
        > picasawebalbum.rajuktitus
        >
        >
        > [Non-text portions of this message have been removed]
        >
        >
        >
        > ------------------------------------
        >
        > Yahoo! Groups Links
        >
        >
        >
        >


        [Non-text portions of this message have been removed]
      • Raju Titus
        Dear friend, Actually I am not good in English and want share with hindi people therefore I am writing in Hindi and Yugandher has take responsibility of
        Message 3 of 5 , Mar 24, 2010
        • 0 Attachment
          Dear friend,
          Actually I am not good in English and want share with hindi people therefore
          I am writing in Hindi and Yugandher has take responsibility of translation.
          He will send Translation.
          thanks
          Raju

          2010/3/24 İnci Gökmen <igokmen@...>

          >
          >
          > Raju
          >
          > can't read your massage!!!
          > inci
          >
          > 2010/3/24 Raju Titus <rajuktitus@... <rajuktitus%40gmail.com>>
          >
          > > *खरपतवार समस्या नहीं है.*
          >
          > > मित्रो,
          > > हमारे एक मित्र है श्री राजेन्द्र सिंह राठौर वो मुझ से आये दिन फोन पर सवाल
          > > करते रहते हैं. वो जैविक खेती विषय पर काम कर रहे हैं. उन्होंने पुछा की
          > > क्या जताई नहीं करने से खेत खरपतवारों से नहीं भर जायेंगे ?
          > > मेने कहा
          > > कुदरत हमेशा जमीन को हरयाली से ढंकना चाहती है किन्तु हम कटाई,
          > > जुताई,चराई,खरपतवार नाशकों से और आग लगाकर हरयाली को निरंतर नस्ट करते रहते
          > > है. इस लिए कुदरत नई नई और अनेक कठिन खरपतवारों को भेजती रहती है. जैसे काँस
          > > ,गाजरघास आदि.
          > > यदि हम ये तमाम गेर पर्यवार्नीय कामो को बंद कर खेती करें तो फ़िर खरपतवार
          > > हमारे मित्र बन जाते हैं और वो अपने आप हमारे रास्ते से हट जाते हैं.
          > > कुदरती खेती करने से पहले हमारे खेत काँस घास से भर गए थे.
          > > ये घास जमीन के नीचे ३० फीट तक पहुँच गयी थी. इसकी जड़ों मे हर इंच पर गठन
          > > होती
          > > है और ये हर गठान से पनप जाती है.कोई मशीन या खरपतवारनाशक इस को नस्ट नहीं
          > कर
          > > सकता है.
          > > किन्तु जुताई छोड़ने से ये अपने आप चली गई.
          > > हम आसानी से बिना जुताई करे इसमें खेती करने लगे थे.
          > > इसलिए हम कहते हैं की हरयाली बचाना है तो बिना जुताई की खेती करना सब से सरल
          > > उपाय है. हमारे खेत पूरे आज ऊँचे ऊँचे पेडों से भरे हैं. जिनसे हमें सब कुछ
          > > मिल
          > > रहा है.
          > > धन्यवाद
          > > राजू
          > >
          > > --
          > > Raju Titus. Hoshangabad.India.
          > > +919179738049.
          > > picasawebalbum.rajuktitus
          > >
          > >
          > > [Non-text portions of this message have been removed]
          > >
          > >
          > >
          > > ------------------------------------
          > >
          > > Yahoo! Groups Links
          > >
          > >
          > >
          > >
          >
          > [Non-text portions of this message have been removed]
          >
          >
          >



          --
          Raju Titus. Hoshangabad.India.
          +919179738049.
          picasawebalbum.rajuktitus


          [Non-text portions of this message have been removed]
        • Tom Gibson
          Nice script. ... है.* ... श्री राजेन्द्र सिंह राà¤
          Message 4 of 5 , Mar 24, 2010
          • 0 Attachment
            Nice script.


            --- In fukuoka_farming@yahoogroups.com, Raju Titus <rajuktitus@...>
            wrote:
            >
            > *खरपतवार समस्या नहीं
            है.*
            > मित्रो,
            > हमारे एक मित्र है
            श्री राजेन्द्र सिंह
            राठौर वो मुझ से
            आये दिन फोन पर सवाल
            > करते रहते हैं. वो
            जैविक खेती विषय पर
            काम कर रहे हैं.
            उन्होंने पुछा की
            > क्या जताई नहीं
            करने से खेत
            खरपतवारों से नहीं
            भर जायेंगे ?
            > मेने कहा
            > कुदरत हमेशा जमीन को
            हरयाली से ढंकना
            चाहती है किन्तु हम
            कटाई,
            > जुताई,चराई,खरपतवार
            नाशकों से à¤"र आग
            लगाकर हरयाली को
            निरंतर नस्ट करते
            रहते
            > है. इस लिए कुदरत नई
            नई à¤"र अनेक कठिन
            खरपतवारों को
            भेजती रहती है.
            जैसे काँस
            > ,गाजरघास आदि.
            > यदि हम ये तमाम गेर
            पर्यवार्नीय कामो को
            बंद कर खेती करें
            तो फ़िर खरपतवार
            > हमारे मित्र बन जाते
            हैं à¤"र वो अपने आप
            हमारे रास्ते से हट
            जाते हैं.
            > कुदरती खेती करने
            से पहले हमारे खेत
            काँस घास से भर गए
            थे.
            > ये घास जमीन के
            नीचे ३० फीट तक
            पहुँच गयी थी. इसकी
            जड़ों मे हर इंच पर
            गठन होती
            > है à¤"र ये हर गठान
            से पनप जाती है.कोई
            मशीन या खरपतवारनाशक
            इस को नस्ट नहीं कर
            > सकता है.
            > किन्तु जुताई
            छोड़ने से ये अपने
            आप चली गई.
            > हम आसानी से बिना
            जुताई करे इसमें
            खेती करने लगे थे.
            > इसलिए हम कहते हैं
            की हरयाली बचाना है
            तो बिना जुताई की
            खेती करना सब से सरल
            > उपाय है. हमारे खेत
            पूरे आज ऊँचे ऊँचे
            पेडों से भरे हैं.
            जिनसे हमें सब कुछ
            मिल
            > रहा है.
            > धन्यवाद
            > राजू
            >
            > --
            > Raju Titus. Hoshangabad.India.
            > +919179738049.
            > picasawebalbum.rajuktitus
            >
            >
            > [Non-text portions of this message have been removed]
            >
          • Yugandhar S
            ... Friends, I have a friend by the name Rajendra Singh Rathore. He is working on organic farming. He keeps asking me questions and recently he asked Wouldn t
            Message 5 of 5 , Mar 25, 2010
            • 0 Attachment
              English Translation:
              -------------------------------
              Friends,
              I have a friend by the name Rajendra Singh Rathore. He is working on
              organic farming. He keeps asking me questions and recently he asked
              "Wouldn't weeds take over the fields if we stop tilling?"

              I said, "Nature always wants to keep the earth covered with greenery. But,
              we continually destroy the green cover by cutting, tilling, grazing,
              weedicides/weeders and burning. So, nature keeps giving birth to new and
              stubborn weeds to counter man's actions like 'Kaans grass' and Parthenium(
              Gaajar ghaans) etc. If we stop the above mentioned human activities of
              destructing the green cover, the so called weeds automatically become our
              friends and move out of our path.

              My fields were filled with 'Kaans' grass before taking up natural farming.
              The roots of this grass grow 30 feet below the surface and entagle
              themselves with other roots at every inch. This deep mesh of roots cannot be
              removed by any machine and this grass cannot be eliminated by using
              weedicides. After I stopped tilling the land, and started doing natural
              farming among this grass without tilling ,it slowly disappeared. Now I am
              easily able to practice natural farming without the trouble of this grass.

              So, If you want to protect the greenery and environment of this earth,
              please do no-till natural farming, which is the easiest solution. Today, my
              fields are filled with tall and dense trees from which I am getting many
              things."

              Thanks
              --Raju Titus
              ----------------------------------------
              --Yugandhar

              2010/3/24 Raju Titus <rajuktitus@...>

              >
              >
              > *खरपतवार समस्या नहीं है.*
              > मित्रो,
              > हमारे एक मित्र है श्री राजेन्द्र सिंह राठौर वो मुझ से आये दिन फोन पर सवाल
              > करते रहते हैं. वो जैविक खेती विषय पर काम कर रहे हैं. उन्होंने पुछा की
              > क्या जताई नहीं करने से खेत खरपतवारों से नहीं भर जायेंगे ?
              > मेने कहा
              > कुदरत हमेशा जमीन को हरयाली से ढंकना चाहती है किन्तु हम कटाई,
              > जुताई,चराई,खरपतवार नाशकों से और आग लगाकर हरयाली को निरंतर नस्ट करते रहते
              > है. इस लिए कुदरत नई नई और अनेक कठिन खरपतवारों को भेजती रहती है. जैसे काँस
              > ,गाजरघास आदि.
              > यदि हम ये तमाम गेर पर्यवार्नीय कामो को बंद कर खेती करें तो फ़िर खरपतवार
              > हमारे मित्र बन जाते हैं और वो अपने आप हमारे रास्ते से हट जाते हैं.
              > कुदरती खेती करने से पहले हमारे खेत काँस घास से भर गए थे.
              > ये घास जमीन के नीचे ३० फीट तक पहुँच गयी थी. इसकी जड़ों मे हर इंच पर गठन होती
              > है और ये हर गठान से पनप जाती है.कोई मशीन या खरपतवारनाशक इस को नस्ट नहीं कर
              > सकता है.
              > किन्तु जुताई छोड़ने से ये अपने आप चली गई.
              > हम आसानी से बिना जुताई करे इसमें खेती करने लगे थे.
              > इसलिए हम कहते हैं की हरयाली बचाना है तो बिना जुताई की खेती करना सब से सरल
              > उपाय है. हमारे खेत पूरे आज ऊँचे ऊँचे पेडों से भरे हैं. जिनसे हमें सब कुछ
              > मिल
              > रहा है.
              > धन्यवाद
              > राजू
              >
              > --
              > Raju Titus. Hoshangabad.India.
              > +919179738049.
              > picasawebalbum.rajuktitus
              >
              > [Non-text portions of this message have been removed]
              >
              >
              >


              [Non-text portions of this message have been removed]
            Your message has been successfully submitted and would be delivered to recipients shortly.