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Re: [fukuoka_farming] SEED BALL MAKING.

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  • Raju Titus
    प्रिय मित्र, ये हमारी खोज नहीं है ये फुकुओकाजी की खोज है.
    Message 1 of 3 , Jan 9, 2010
      प्रिय मित्र,
      ये हमारी खोज नहीं है ये फुकुओकाजी की खोज है. हमारा तो बस इस में इतना योगदान
      है की हमने फुकुओकाजी की खेती को समझने और उसे भारत में हकीकत बनाया है.इस में
      इस ग्रुप का बहुत बड़ा योगदान है. सब से बड़ा योगदान में इस में लेरी कोर्न का
      है यदि वो इस का जापानी भाषा से अंग्रजी में अनुवाद नहीं करते तो ये विचारधारा
      हम तक कैसे पहुँचती. दूसरा में इस के लिए परताप जी का आभारी हूँ जिन्होंने इस
      को भारत में छपवा कर और इस को हम तक पहुँचाया है. फुकुओका फार्मिंग में बहुत
      छोटी छोटी और बिलकुल आसान बातें हैं किन्तु इनको खेती करे बिना समझना मुस्किल
      है. जैसे जुताई नहीं करना, पुआल और नरवाई को जंहा का तंहा वापस डालना और दलहनी
      फसल साथ में उगाना आदि.पूरा खेती का सही विज्ञानं इस में छुपा है.ये विज्ञानं
      अब धीरे धीरे कुदरत की और मुड़ेगा और इस में सुधार होगा ऐसा हमारी समझ में आ
      रहा है. सन १९९९ में जब हम फुकुओका जी से में मिले थे. वो कह रहे थे की आज
      यदि गांधीजी होते तो वे चरखे के साथ साथ बीज गोलियों को बनाना भी सिखाते.
      किन्तु अफ़सोस की बात है की भारत के गाँधी सेंटर में भी जमीन की जुताई के लिए
      ट्रेक्टरों का इस्तमाल हो रहा है और हानिकारक रसायनों से खेती की जाने लगी है.
      पर्तापजी और मार्जरी बहन जब होशंगाबाद के क्वेकर सेंटर में थे जब उम्मीद थी की
      कम से कम ये सेंटर इस विधा को कर के भारत में प्रचारित करेगा जिस से भारत के
      किसानो की गरीबी दूर होगी किन्तु वो भी इस में असफल रहे हैं.फुकुओकाजी की खेती,
      गांधीजी और क्वेकर (Friends ) विचारधारा में बहुत समानता है. ये जरुर है की
      हमें भी इसे समझने में समय लगा.
      शालिनी और राजू टाइटस =======
      Dear Friends,
      The methods of natural farming are not my findings. They are findings from
      the research by Mr.Fukuoka. My contribution is just in understanding
      Mr.Fukuoka's natural farming and making it a practical reality in India.
      There is a massive contribution of this group in this result. Of course, Mr.
      Larry Korn is the biggest contributor, without whose English translation of
      'One Straw Revolution', the great thoughts of Mr.Fukuoka would never reach
      me. Next, I am grateful to Sri Partap Ji, who has published this in India
      and made this jewel of a book within our reach. There are very small and
      simple things in Fukuoka farming, but it is difficult to understand these
      without practically doing them in a farm. Simple things like no tilling,
      spreading of straw, leguminous companion panting, inter cropping etc can
      only be understood by practical farming. There is a great amount of total
      farming knowledge hidden in these methods. I feel that there is a slow trend
      shift towards nature and natural methods and it is going to develop in
      future. When I met Mr.Fukuoka in May 1999, he said,"If Mahatma Gandhi ji
      would have been alive at this time, he would teach seed ball making along
      with Charka (cotton spinning wheel)". But the sad fact is that even in
      'Gandhi Center' farming is done using tractors and harmful chemical
      fertilizers and pesticides. When Sri PartapJi and Marjory bahan were present
      at the Quaker center in Hoshangabad, I hoped that at least they could spread
      this great knowledge of natural farming to the farmers of India and save
      them from poverty. Unfortunately they were unsuccessful in doing this. There
      is much similarity in Mr.Fukuoka's natural farming, Mahatma Gandhi's and
      Quaker's( friends') thought processes. It is however true that, we also
      spent much time to understand the essence of the natural farming methods.
      - Shalini and Raju Titus.
      2010/1/8 Frank McAvinchey <fmcavin@...>

      >
      >
      > This looks like a most excellent way to make seed balls. Here I was, trying
      > to invent a machine that would make seed balls automatically, and you
      > invent
      > a simple, highly effective means of doing the same thing. Good work, my
      > friend!
      >
      > Frank
      >
      > 2010/1/8 Raju Titus <rajuktitus@... <rajuktitus%40gmail.com>>
      >
      >
      > >
      > >
      > > Dear Kumar swami and Friends,
      > >
      > > We use the soil excavated by termites to make seed balls.I use cay also
      > > which used in making earthen pots. This time we were lucky enough to get
      > > termite soil close to our home for our use. We dug up the clay and
      > > sprinkled
      > > water on it so that the clay became broken and scattered. Then
      > >
      > > we mixed 2 cups of paddy in one Tagadi (pot generally used in shifting
      > > concrete mixture)
      > >
      > >
      > http://picasaweb.google.co.in/lh/photo/fRe1Q_XjgRZIpG6Wha4RBw?feat=directlink
      > > soil and kneaded it like wheat flour dough used to make chapatis. Then we
      > > made half inch thick cakes of this clay dough and pressed it on a chicken
      > > mesh to make small pieces. Care must be taken to ensure that the pieces
      > are
      > > between half to one inch in size and each piece must contain at least one
      > > seed of paddy. Also make sure that the dough is soft like the bottom part
      > > of our ear. Then we allow these pieces for one day for roiling by
      > hands.we
      > > dry seed balls in shade or they can be scattered in the field right away.
      > > This is the common and successful method to make seed balls. Using this
      > > method few people can make seed balls for many acres of farm.
      > (Translation
      > > by S.Yugandhar)
      > >
      > > Raju Titus
      > > http://picasaweb.google.com/rajuktitus/SEEDBALLMAKING?feat=directlink
      > >
      > > प्रिय मित्रों,
      > > हम SEED BALL बनाने के लिए दीमक के द्वारा निकाली गई मिटटी या CLAY जिस से
      > > मिटटी के बर्तन बनाये जाते हैं का उपयोग करते हैं. इस समय हमें आसानी से
      > हमारे
      > > घर के पास दीमक की मिटटी मिल गई इस लिए हमने इस का उपयोग किया है. इसे खोद
      > कर
      > > उसमे पानी छिड़क दिया जिस से ये मिटटी बिखर गयी .फिर एक तगाड़ी मिटटी में दो
      > > कप धान के बीज मिला कर इस मिटटी को आटे(चपाती वाले) के सामान गूथ लिया. फिर
      > > इसे मोटी मोटी रोटी के सामान बनाकर मुर्गाजली से दबाकर उसके टुकड़े गिरा
      > लिए.
      >
      > > इस में इस बात का ध्यान देने की जरुरत है की गोली १/२ इंच से एक इंच के बीच
      > ही
      > > रहे और एक गोली में कम से कम एक बीज जरुर रहे. मिटटी को गूथते समय इस की
      > > कंसिस्टेंसी अपने कान के निचले हिस्से के जैसी नर्म होनी चाहिए. फिर इन
      > > गोलियों को छाया में सूखने के लिए रख सकते हैं या सीधे भी फेंक सकते हैं.आते
      > > हैं. ये गोली बनाने का सामान्य और कामयाब तरीका है. इस से कुछ लोग मिलकर
      > अनेक
      > > एकड़ के लिए आसानी से गोलियां बना सकते हैं.
      > > राजू टाइटस
      > >
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