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invitation - YOUTH CONVENTION

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  • SADRE ALAM
    *दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम* दिनांक- 25 दिसम्बर 2013 *अधिवेशन* अपील
    Message 1 of 2 , Dec 26, 2013
      दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम
      दिनांक- 25 दिसम्बर 2013


      अधिवेशन

      अपील

      फोरम के बारे में: दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम का गठन दिसम्बर 2007 में किया गया। इस फोरम की शुरूआत खानपुर, वजीरपुर, कुसुमपुर पहाड़ी एंव रोहिणी के युवाओं को एक साथ लाकर किया गया। इस फोरम के गठन के पीछे का मकसद युवाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जीवन से जुड़े मुद्दे एंव सामाजिक समस्याओं से अवगत कराना एंव उन समस्याओं को समझ कर उनसे नजात पाने के लिए रास्ता तलाश करना था।

      जहां एक तरफ दिल्ली के अन्दर अच्छे अच्छे स्कूल हैं जिन में पढ़ाई, खेलकूद एंव सांस्कृतिक कार्यक्रमों व मनोरंजन से लेकर ऐतिहासिक धरोहरों के भ्रमण आदि कराये जाते हैं, जिनसे उनका ज्ञान बढ़ता है एवं दिलचस्पी भी बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर शहर के गरीब युवा जो झुग्गी बस्तियों, पुनर्वास कालोनियों एवं कच्ची कालोनियों में रहते हैं, न ता ेउनकी स्कूली शिक्षा उतनी अच्छी होती है और न अन्य खेलकूद, सांस्कृति व ऐतिहासिक चीजों को देखने समझने का मौका मिलता है। कारनवश एक समय के बाद युवाओं में पढ़ने की दिलचस्पी समाप्त हो जाती है साथ ही साथ अच्छे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बच्चियों को बेहतर स्थिती में देख कर निराशा भी होने लगती है जो धीरे धीरे अलग रास्ते पर ले जाती है। युवाओं में कला, संस्कृति, खेलकूद, शिक्षा, ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण एंव इस तरह के अन्य माध्यमों का इस्तामाल कर युवाओं को एकजुट कर उनके द्वारा सामाजिक मुददों को समाज के सामने एंव खासतौर पर युवाओं के सामने लाने के लिए दिल्ली यंग आर्टिस्ट्स फोरम का गठन किया गया था और वह सिलसिला लगातार जारी है।

      अधिवेशन: इस फोरम का औपचारिक गठन 2007 में हुआ था लेकिन तब फोरम सिर्फ नुक्कड़ नाटक कार्यशाला एवं नाटक प्रस्तुति तक सिमित था। 2008 के अन्त स ेफोरम के कार्यक्रमों में अन्य गतिविधियां भी शामिल हुईं, जिस कारन युवाओं से सम्पर्क का दायरा भी बढ़ा एवं मुददे भी जुड़ते चलेगए। जो फोरम नुक्कड़ नाटक से शुरु हुआ था आज उसके तहत स्केचिंग, पेन्टिंग, ग्लास पेन्टिंग, कार्ड डिजाइनिंग, कोलाज, पोस्टर प्रदर्शनी, साईकिल यात्रा, ऐतिहासिक स्थल भ्रमण, एक्सपोजर ट्रिप, गीत/संगीत/डांस, डांसड्रामा, खेल प्रतियोगिता, रंगोली, त्योहार मिलन, प्रसिद्ध दिवस समारोह, गोष्ठी, परिचर्चा एवं शैक्षिक कलास आदि जैसे पहल शामिल होते गए। जो फोरम 4 बस्तियों के 20-25 युवाओं से शुरु हुआ था आज उसका दायरा बढ़कर तिग्री, मदनगीर, रविदासकैम्प, बवाना, भलस्वा, पप्पन कला एवं सावदा घेवरा में 200 सदस्यों के साथ अनौपचारिक टीम के रुप में है। जैसे जैसे फोरम का विस्तार हुआ है फोरम के सामने बहुत से स्वाल भी आए हैं। फोरम का कार्यक्रम एवं उददेश्य क्या है ? फोरम के मुख्य प्रस्ताव क्या हैं ? फैसला लेने की समिति कौन सी है ? 

      अनौपचारिक तौर पर काम के दौरान खुदही इन स्वालों के जवाब तैयार होते गए, 5 सालों के बाद आज जरुरत इस बात की है कि इन कार्यक्रम, उददेश्य, प्रस्ताव, फैसला लेने की समिति एवं फोरम के अन्य पहलुओं पर चर्चा कर इसे रेखांकित किया जाए ताकि फोरम के कामों के विस्तार में कोई समस्या न आए।

      मुददे: जैसा कि परिचय में अंकित है फोरम की शुरुआत युवाओं में कला के माध्यम से सामाजिक चेतना पैदा करने के मकसद से हुई थी, दो साल के बाद यह प्रश्न आया कि 8वीं 9वीं कक्षा में आकर बड़ी संख्यां में युवा पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसका कारण यह है कि उपर की कक्षाओं में आकर उनपर पढ़ाई का दबाव अचानक बढ़ जाता है जिसका सामना सभी युवा नहीं कर पाते हैं। घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारन उनपर कमाने का दबाव भी बना रहता है, वह सब भूलकर घर बैठ जात ेहैं। ऐसे युवाओं को ध्यान में रखते हुए कि पढ़ने की दिलचस्पी बनीरहे, बस्तियों में समूह में पढ़ने एवं खेलने की प्रक्रिया शुरु की गई ताकि सामूहिक्ता के कारन अचानक पढ़ाई न छूटे। दिलचस्पी बनाए रखने के लिए शहर भ्रमण, एक्सपोजर ट्रिप जैसे कार्यक्रमों का आयोजन शुरु हुआ।

      नई बसाई गई पुनर्वास कालोनी के युवाओं का कार्यक्रम में शामिल होने के कारन उनके द्वारा फोरम के सामने एक बड़ा मुददा सामने आया। इस मुददे ने हमारे काम के दायरे को और वयापक बनादिया। पुनर्वास का असर आवास और रोजगार पर किस प्रकार पड़ता है, शहरी मुददों पर काम करने वालों के सामने यह सबसे बड़ा प्रश्न था। फोरम के साथ जुड़े युवाओं ने पुनर्वास का असर उनकी शिक्षा एवं जिन्दगी पर पड़ने के विभिन्न पहलुओं को इस प्रकार उजागर किया कि शहरी मजदूरों के सामने यह स्वाल सबसे गम्भीर रुप में सामने आया। केस स्टडीज एवं आपबीतियों को सुनने के बाद फोरम में यह मुददा मुख्य रुपसे शहरी युवाओं का सबसे बड़ा मुददा बनकर सामने आया। झुग्गी उजड़ने के खौफ से लेकर पुनर्वास प्रक्रिया, बेघर होना, पढ़ाई का छूटना, दूसरे स्कूलों में नई जगह पर दाखिला न मिलना, दोस्तों का बिछड़ना, दर बदर होकर गलत रास्ते पर निकल जाना युवाओं के भविष्य के साथ साथ देश के भविष्य को भी प्रश्न के दायरे में ला खड़ा करता है। फोरम के सामने यह चुनौती थी कि आखिर वह कौन स ीप्रक्रिया होगी जिसके माघ्यम से इन युवाओं की समस्याओं का समाधान तलाश किया जा सकता है। पुनर्वास के खिलाफ टकराव के इलावह अभी तक फोरम के सामने दूसरा कोई रास्ता नजर नहीं आता जिसके माघ्यम से इस पुनर्वास को रोका जासके या पुनार्वस के गलत प्रभाव को कम किया जा सके। हमारी ऐसी प्रक्रिया जरुर जारी है जिसस ेप्रभावित युवाओं के अन्दर दिलचस्पी पैदा करते हुए खेल कूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को दोबारा समूह में लाते हुए पढ़ने पढ़ाने की इच्छा पैदा कर सामान्य जीवन की ओर वापस लाया जा सके। इस पहल में फोरम जरुर आगे बढ़ता दिख रहा है लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं। समाधान की तरफ बढ़ने के लिए युवाओं से जुड़े सभी मुददों को- खास कर शहरी मजदूरों के युवाओं एवं बच्चों के मुददों को ध्यान में रख कर कार्य योजना बनाने की जरुरत है ताकि वह अपने प्रश्नों का जवाब खुद तलाश कर सकें।

      दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम का यह अधिवेशन 30 दिसम्बर 2013 को आई एस आई, लोधीरोड, नई दिल्ली में होने जा रहा है। आप से अनुरोध है कि इस अधूवेशन में शामिल होकर युवाओं की हौसला अफ़ज़ाई करें। 

      कृपया अपने आने की सूचना ईमेल द्वारा ज़रूर दें ताकि व्यवस्था में सहयोग मिल सके 

      धन्यवाद 

      ( राहुल कुमार, किरन देवी, पीयूष यादव, प्रीती मेवाती, दिलीप कुमार,  ------ सदस्य, आयोजन समिति ) 


      --
      SADRE ALAM

      09212391836 
      ccssd.org@... (Formal) 

        
      तुम आसमाँ की बुलन्दी से जल्द लौट आना
      हमें ज़मीं के मसायिल पे बात करनी है

      मंजिल पे पहुंचा तो जुनूँ पहुंचा
      अक्ल दावा लिए सड़कों पे फिरा करती है

    • rajagopalan ss
      WISH THE CONVENTION ALL SUCCESS. SSR From: sadrealam@gmail.com To: arkitectindia@yahoogroups.com Date: Thu, 26 Dec 2013 23:38:56 +0530 Subject: [Arkitect
      Message 2 of 2 , Dec 27, 2013
        WISH THE CONVENTION ALL SUCCESS.
        SSR


        From: sadrealam@...
        To: arkitectindia@yahoogroups.com
        Date: Thu, 26 Dec 2013 23:38:56 +0530
        Subject: [Arkitect India] invitation - YOUTH CONVENTION

         
        दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम
        दिनांक- 25 दिसम्बर 2013


        अधिवेशन

        अपील

        फोरम के बारे में: दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम का गठन दिसम्बर 2007 में किया गया। इस फोरम की शुरूआत खानपुर, वजीरपुर, कुसुमपुर पहाड़ी एंव रोहिणी के युवाओं को एक साथ लाकर किया गया। इस फोरम के गठन के पीछे का मकसद युवाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जीवन से जुड़े मुद्दे एंव सामाजिक समस्याओं से अवगत कराना एंव उन समस्याओं को समझ कर उनसे नजात पाने के लिए रास्ता तलाश करना था।

        जहां एक तरफ दिल्ली के अन्दर अच्छे अच्छे स्कूल हैं जिन में पढ़ाई, खेलकूद एंव सांस्कृतिक कार्यक्रमों व मनोरंजन से लेकर ऐतिहासिक धरोहरों के भ्रमण आदि कराये जाते हैं, जिनसे उनका ज्ञान बढ़ता है एवं दिलचस्पी भी बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर शहर के गरीब युवा जो झुग्गी बस्तियों, पुनर्वास कालोनियों एवं कच्ची कालोनियों में रहते हैं, न ता ेउनकी स्कूली शिक्षा उतनी अच्छी होती है और न अन्य खेलकूद, सांस्कृति व ऐतिहासिक चीजों को देखने समझने का मौका मिलता है। कारनवश एक समय के बाद युवाओं में पढ़ने की दिलचस्पी समाप्त हो जाती है साथ ही साथ अच्छे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बच्चियों को बेहतर स्थिती में देख कर निराशा भी होने लगती है जो धीरे धीरे अलग रास्ते पर ले जाती है। युवाओं में कला, संस्कृति, खेलकूद, शिक्षा, ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण एंव इस तरह के अन्य माध्यमों का इस्तामाल कर युवाओं को एकजुट कर उनके द्वारा सामाजिक मुददों को समाज के सामने एंव खासतौर पर युवाओं के सामने लाने के लिए दिल्ली यंग आर्टिस्ट्स फोरम का गठन किया गया था और वह सिलसिला लगातार जारी है।

        अधिवेशन: इस फोरम का औपचारिक गठन 2007 में हुआ था लेकिन तब फोरम सिर्फ नुक्कड़ नाटक कार्यशाला एवं नाटक प्रस्तुति तक सिमित था। 2008 के अन्त स ेफोरम के कार्यक्रमों में अन्य गतिविधियां भी शामिल हुईं, जिस कारन युवाओं से सम्पर्क का दायरा भी बढ़ा एवं मुददे भी जुड़ते चलेगए। जो फोरम नुक्कड़ नाटक से शुरु हुआ था आज उसके तहत स्केचिंग, पेन्टिंग, ग्लास पेन्टिंग, कार्ड डिजाइनिंग, कोलाज, पोस्टर प्रदर्शनी, साईकिल यात्रा, ऐतिहासिक स्थल भ्रमण, एक्सपोजर ट्रिप, गीत/संगीत/डांस, डांसड्रामा, खेल प्रतियोगिता, रंगोली, त्योहार मिलन, प्रसिद्ध दिवस समारोह, गोष्ठी, परिचर्चा एवं शैक्षिक कलास आदि जैसे पहल शामिल होते गए। जो फोरम 4 बस्तियों के 20-25 युवाओं से शुरु हुआ था आज उसका दायरा बढ़कर तिग्री, मदनगीर, रविदासकैम्प, बवाना, भलस्वा, पप्पन कला एवं सावदा घेवरा में 200 सदस्यों के साथ अनौपचारिक टीम के रुप में है। जैसे जैसे फोरम का विस्तार हुआ है फोरम के सामने बहुत से स्वाल भी आए हैं। फोरम का कार्यक्रम एवं उददेश्य क्या है ? फोरम के मुख्य प्रस्ताव क्या हैं ? फैसला लेने की समिति कौन सी है ? 

        अनौपचारिक तौर पर काम के दौरान खुदही इन स्वालों के जवाब तैयार होते गए, 5 सालों के बाद आज जरुरत इस बात की है कि इन कार्यक्रम, उददेश्य, प्रस्ताव, फैसला लेने की समिति एवं फोरम के अन्य पहलुओं पर चर्चा कर इसे रेखांकित किया जाए ताकि फोरम के कामों के विस्तार में कोई समस्या न आए।

        मुददे: जैसा कि परिचय में अंकित है फोरम की शुरुआत युवाओं में कला के माध्यम से सामाजिक चेतना पैदा करने के मकसद से हुई थी, दो साल के बाद यह प्रश्न आया कि 8वीं 9वीं कक्षा में आकर बड़ी संख्यां में युवा पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसका कारण यह है कि उपर की कक्षाओं में आकर उनपर पढ़ाई का दबाव अचानक बढ़ जाता है जिसका सामना सभी युवा नहीं कर पाते हैं। घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारन उनपर कमाने का दबाव भी बना रहता है, वह सब भूलकर घर बैठ जात ेहैं। ऐसे युवाओं को ध्यान में रखते हुए कि पढ़ने की दिलचस्पी बनीरहे, बस्तियों में समूह में पढ़ने एवं खेलने की प्रक्रिया शुरु की गई ताकि सामूहिक्ता के कारन अचानक पढ़ाई न छूटे। दिलचस्पी बनाए रखने के लिए शहर भ्रमण, एक्सपोजर ट्रिप जैसे कार्यक्रमों का आयोजन शुरु हुआ।

        नई बसाई गई पुनर्वास कालोनी के युवाओं का कार्यक्रम में शामिल होने के कारन उनके द्वारा फोरम के सामने एक बड़ा मुददा सामने आया। इस मुददे ने हमारे काम के दायरे को और वयापक बनादिया। पुनर्वास का असर आवास और रोजगार पर किस प्रकार पड़ता है, शहरी मुददों पर काम करने वालों के सामने यह सबसे बड़ा प्रश्न था। फोरम के साथ जुड़े युवाओं ने पुनर्वास का असर उनकी शिक्षा एवं जिन्दगी पर पड़ने के विभिन्न पहलुओं को इस प्रकार उजागर किया कि शहरी मजदूरों के सामने यह स्वाल सबसे गम्भीर रुप में सामने आया। केस स्टडीज एवं आपबीतियों को सुनने के बाद फोरम में यह मुददा मुख्य रुपसे शहरी युवाओं का सबसे बड़ा मुददा बनकर सामने आया। झुग्गी उजड़ने के खौफ से लेकर पुनर्वास प्रक्रिया, बेघर होना, पढ़ाई का छूटना, दूसरे स्कूलों में नई जगह पर दाखिला न मिलना, दोस्तों का बिछड़ना, दर बदर होकर गलत रास्ते पर निकल जाना युवाओं के भविष्य के साथ साथ देश के भविष्य को भी प्रश्न के दायरे में ला खड़ा करता है। फोरम के सामने यह चुनौती थी कि आखिर वह कौन स ीप्रक्रिया होगी जिसके माघ्यम से इन युवाओं की समस्याओं का समाधान तलाश किया जा सकता है। पुनर्वास के खिलाफ टकराव के इलावह अभी तक फोरम के सामने दूसरा कोई रास्ता नजर नहीं आता जिसके माघ्यम से इस पुनर्वास को रोका जासके या पुनार्वस के गलत प्रभाव को कम किया जा सके। हमारी ऐसी प्रक्रिया जरुर जारी है जिसस ेप्रभावित युवाओं के अन्दर दिलचस्पी पैदा करते हुए खेल कूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को दोबारा समूह में लाते हुए पढ़ने पढ़ाने की इच्छा पैदा कर सामान्य जीवन की ओर वापस लाया जा सके। इस पहल में फोरम जरुर आगे बढ़ता दिख रहा है लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं। समाधान की तरफ बढ़ने के लिए युवाओं से जुड़े सभी मुददों को- खास कर शहरी मजदूरों के युवाओं एवं बच्चों के मुददों को ध्यान में रख कर कार्य योजना बनाने की जरुरत है ताकि वह अपने प्रश्नों का जवाब खुद तलाश कर सकें।

        दिल्ली यंग आर्टिस्टस फोरम का यह अधिवेशन 30 दिसम्बर 2013 को आई एस आई, लोधीरोड, नई दिल्ली में होने जा रहा है। आप से अनुरोध है कि इस अधूवेशन में शामिल होकर युवाओं की हौसला अफ़ज़ाई करें। 

        कृपया अपने आने की सूचना ईमेल द्वारा ज़रूर दें ताकि व्यवस्था में सहयोग मिल सके 

        धन्यवाद 

        ( राहुल कुमार, किरन देवी, पीयूष यादव, प्रीती मेवाती, दिलीप कुमार,  ------ सदस्य, आयोजन समिति ) 


        --
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        09212391836 
        ccssd.org@... (Formal) 

          
        तुम आसमाँ की बुलन्दी से जल्द लौट आना
        हमें ज़मीं के मसायिल पे बात करनी है

        मंजिल पे पहुंचा तो जुनूँ पहुंचा
        अक्ल दावा लिए सड़कों पे फिरा करती है


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