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'आप' कहां है

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  • Ashwini Singh
    हमारे कामरेड़ भाईयों की किंकर्तव्यविमूढ़ता का ही नतीजा है
    Message 1 of 3 , Dec 8, 2013
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      हमारे 'कामरेड़' भाईयों की किंकर्तव्यविमूढ़ता का ही नतीजा है कि 'कांग्रेस' के विकल्प के रूप में जनता ने 'आम आदमी पार्टी' को चुना। यदि कामरेड़ भाई सक्रिय होते तो ये नतीजे 'जनवादी' हो सकते थे। विरोध नहीं विकल्प देने वाला ही इतिहास में दर्ज होगा। 'जनता' विरोध नहीं 'विकल्प' चाहती है।  विकल्प चाहे छणिक हो... विकल्प है तो मैदान में आये। जनता की आदालत ही फैसला करेगी की आपका विरोध विकल्प है अथवा नहीं। 

      भेडीयों से मेमने के हीत की रक्षा की उम्मिद बेमानी है।

      अश्विनी

      9210473599

    • Ashwini Singh
      Manoj Kumarjha ने कहां, बीमार के लिए करवट बदलना भी राहत की तरह है। पर
      Message 2 of 3 , Dec 8, 2013
      • 0 Attachment
        Manoj Kumarjha ने कहां, "बीमार के लिए करवट बदलना भी राहत की तरह है। पर 'आप' की सरकार तो बनती नहीं। विपक्ष में बैठ कर 'आप' भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रख सकती है, पर क्या अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों को भ्रष्टाचार की जड़ों के बारे में पता है। मेहनत की लूट में है भ्रष्टाचार का स्रोत...वामपंथी खुद ही भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाते रहे हैं...."
         मेरा जबाब , " जी मनोज जी क्या फर्क पड़ता है। शायद पता हो पर वह उनके अजैंडे में ना हो। पर जीनके अजैड़े में है, वे कहां है। वे जंतर-मंतर से सीधे अपनी मांदों मे क्यों लोट जाते है। गलियों में जाकर खड़े क्यों नहीं होते। सामना करते शायद ये फैसला आपके पक्ष में आता।"

        अश्विनी






        2013/12/8 Ashwini Singh <ashwini.economics@...>
        हमारे 'कामरेड़' भाईयों की किंकर्तव्यविमूढ़ता का ही नतीजा है कि 'कांग्रेस' के विकल्प के रूप में जनता ने 'आम आदमी पार्टी' को चुना। यदि कामरेड़ भाई सक्रिय होते तो ये नतीजे 'जनवादी' हो सकते थे। विरोध नहीं विकल्प देने वाला ही इतिहास में दर्ज होगा। 'जनता' विरोध नहीं 'विकल्प' चाहती है।  विकल्प चाहे छणिक हो... विकल्प है तो मैदान में आये। जनता की आदालत ही फैसला करेगी की आपका विरोध विकल्प है अथवा नहीं। 

        भेडीयों से मेमने के हीत की रक्षा की उम्मिद बेमानी है।

        अश्विनी

        9210473599


      • डा वी एन शर्मा
        आज की तारीख में आप या अरविन्द केजरीवाल होने का मतलब यह नहीं
        Message 3 of 3 , Dec 9, 2013
        • 0 Attachment
          आज की तारीख में "आप" या अरविन्द केजरीवाल होने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि वे पके पकाये राजनितिक दार्शनिक है या कोई बहुत बड़े क्रांतिकारी हैं या वैसा कदम उठाने जा रहे हैं . "आप" का कमाल और धमाल सिर्फ इतना प्रदर्शित करता है कि इस देश में वैकल्पिक राजनीति की ज़मीन तैयार है और वह और अधिक उर्वरा हो सकती है, कि लोग ऐसे विकल्प कि ओर आकर्षित हुए हैं और अगर कोई ग्रुप वर्त्तमान के राजनितिक दलों (सभी को सड़ा हुआ समझ लें) से इत्तर व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्त्तन के बजाये इम्मानदारी से कुछ मरम्मती कार्य कि बात करे उसे भी समर्थन मिलेगा। "आप" के लिए कठिन परीक्षा का समय तो अभी बाकी है. आगे खाई और पीछे आग वाली बात है.

          वी एन एस      


          10 दिसम्बर 2013 8:29 am को, Manoj Jha <manojkumarjhamk@...> ने लिखा:
          अंबानी का खुश होना और लड्डू बंटवाना स्वाभाविक है। भोपाल में शिवराज ने अंबानी और बिड़ला को शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भेज दिया है। अंबानी और कई दूसरे पूंजीपति पहले से ही मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए प्रयासरत थे और हैं भी। मुकेश अंबानी तो दिल्ली में कांग्रेस  के दफ्तर को अपना दूसरा घर बताते रहे हैं। साफ जाहिर है, हर दल इनके समर्थन के लिए तैयार है। देश के मीडिया पर अंबानी का परोक्ष नियंत्रण है। सवाल ये है कि क्या 'आप' में इतना दम है कि वह इन पूंजीपतियों के विरोध में कोई कार्यक्रम चला सके। किरण बेदी तो उसे भाजपा से मिल कर सरकार बनाने की सलाह दे रही हैं। अरविंद केजरीवाल के गुरु अन्ना का भाजपा प्रेम छुपा नहीं है। अरविंद की खुद की विचारधारा और नीतियां भी स्पष्ट नहीं है। भ्रष्टाचार विरोध, पर भ्रष्टाचार का उत्स कहां है, अरविंद ने इस पर विचार करने की जरूरत समझी है। पॉपुलरिज्म की राजनीति करना आसान हो सकता है, पर सत्ता में बैठकर अरविंद भ्रष्टाचार से कैसे निपटेंगे, इसका कोई ब्लूप्रिंट है उनके पास...शायद नहीं। सुधारवादी विचारधारा और राजनीति पूंजीपतियों का ही हित साधेगी। ये एनजीओ की राजनीति है, जिसके लिए वर्ल्ड बैंक और कई साम्राज्यवादी संस्थाएं सहयोग करती हैं। ये प्रेशरकुकर वाली राजनीति है, अरविंद व्यक्तिगत रूप से ईमानदार हैं, इसमें दो राय नहीं, पर सवाल उठता है, मुक्तिबोध के शब्दों में - 'पार्टनर, तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?'


          2013/12/10 Lokesh Malti Prakash <lokesh1981@...>
          Auto-generated message: Lokesh Malti Prakash has left this conversation and will no longer see your messages

          On December 8, 2013 4:52:02 AM PST, Dr.Ashok Kumar Tiwari wrote:

          आज की चुनाव मतगणना में मुकेश अम्बानी के दूसरे हाथ अर्थात बी.जे.पी. की जीत हुई है, रिलायंस ग्रुप में लड्डू बँट रहे हैं, खुशियाँ मनाई जा रही हैं !  अब वे बी. जे.पी. को आगे करके लूट मचाएँगे ।

          हम सब निवेदन करेंगे कि केजरीवाल लोकसभा के लिए जनता को नेतृत्व प्रदान करें और मोदी अर्थात अम्बानियों के खिलाफ विकल्प प्रदान करें । लोक सभा चुनाव -2014 के लिए  हम सब आज से ही लग जाएँ और प्रण करें कि अम्बानियों ( भ्रष्टाचार) से देश को मुक्त  कराना है ।  जय आप ! जय केजरीवाल !! 

          निवेदक :-


          ( डॉ.अशोक कुमार तिवारी ) 
          सम्पर्क : 9428075674,   dr.ashokkumartiwari@...   


          2013/12/8 Ashwini Singh <ashwini.economics@...>
          Manoj Kumarjha ने कहां, "बीमार के लिए करवट बदलना भी राहत की तरह है। पर 'आप' की सरकार तो बनती नहीं। विपक्ष में बैठ कर 'आप' भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रख सकती है, पर क्या अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों को भ्रष्टाचार की जड़ों के बारे में पता है। मेहनत की लूट में है भ्रष्टाचार का स्रोत...वामपंथी खुद ही भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाते रहे हैं...."
           मेरा जबाब , " जी मनोज जी क्या फर्क पड़ता है। शायद पता हो पर वह उनके अजैंडे में ना हो। पर जीनके अजैड़े में है, वे कहां है। वे जंतर-मंतर से सीधे अपनी मांदों मे क्यों लोट जाते है। गलियों में जाकर खड़े क्यों नहीं होते। सामना करते शायद ये फैसला आपके पक्ष में आता।"

          अश्विनी






          2013/12/8 Ashwini Singh <ashwini.economics@...>
          हमारे 'कामरेड़' भाईयों की किंकर्तव्यविमूढ़ता का ही नतीजा है कि 'कांग्रेस' के विकल्प के रूप में जनता ने 'आम आदमी पार्टी' को चुना। यदि कामरेड़ भाई सक्रिय होते तो ये नतीजे 'जनवादी' हो सकते थे। विरोध नहीं विकल्प देने वाला ही इतिहास में दर्ज होगा। 'जनता' विरोध नहीं 'विकल्प' चाहती है।  विकल्प चाहे छणिक हो... विकल्प है तो मैदान में आये। जनता की आदालत ही फैसला करेगी की आपका विरोध विकल्प है अथवा नहीं। 

          भेडीयों से मेमने के हीत की रक्षा की उम्मिद बेमानी है।

          अश्विनी

          9210473599







          --
          Regards,
          Manoj Kumar Jha,
          Bhopal



          --
          डा वी एन शर्मा / Dr.V.N.Sharma
          Cell No.9431102680,


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