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Decisive Victory of people against Chutka Nuclear Power Plant

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  • Lokesh Malti Prakash
    *Friends,* *With their fearless determination and struggle against the proposed nuclear power plant at Chutka in Mandla district of Madhya Pradesh, people have
    Message 1 of 1 , May 25, 2013

    Friends,

    With their fearless determination and struggle against the proposed nuclear power plant at Chutka in Mandla district of Madhya Pradesh, people have scored a historic victory against the government. For the first time in India, the government had to postpone indefinitely its sham public-hearing that was scheduled on 24th May due to firm opposition of the people. Through their heroic determination the people of Chutka and nearby villages have given a clear message to the government that do not want the nuclear power project at all and also that they are ready to go to any extent for forcing the government to withdraw the project.

    It is notable that the people's victory at Chutka was supported by several organisations including Gondwana Ganatantra Party, Communist Party of India (MP) , Communist Party of India (Marxist-Leninist), Jan Sangharsh Morcha (MP), All India Students' Federetion (AISF), All India Revolutionary Students' Organization (AIRSO), Revolutionary Youth Federation of India (RYFI), Women Against Sexual Violence and State Repression (WSS), Peoples' Initiative Against Nuclear Power,  Madhya Pradesh Mahila Manch and Shiksha Adhikar Manch, Bhopal.

    A delegation of nearly 15 young men and women from of CPI (ML), AISF, AIRSO and RYFI carried a rigorous public awareness campaign against nuclear energy nearly a week before 24th May in more than 20 villages  around Chutka and at several places in Jabalpur. 

    (A press-release that was issued in a press conference held in Bhopal on 25th May is pasted below.)

    - Lokesh Malti Prakash

    Shiksha Adhikaar Manch, Bhopal



    चुटका परमाणु ऊर्जा संयंत्र के खिलाफ प्रतिरोध की जीत

    व्यापक जन-उभार के चलते सरकार को जन-सुनवाई रद्द करनी पड़ी

     

    प्रेस-विज्ञप्ति

    25 मई 2013

     

    चुटका परमाणु संयंत्र के खिलाफ चुटका व आसपास के गांवों की आदिवासी जनता द्वारा चलाए जा रहे जुझारू संघर्ष और तमाम जनपक्षधर संगठनों के सक्रीय समर्थन व प्रयासों से उभरे जबरदस्त जन-उभार के आगे सरकार ने घुटने टेकते हुए 24 मई 2013 को तय की गई जन-सुनवाई को अनिश्चित काल के लिए रद्द करना पड़ा। ध्यान दें कि चुटका परमाणु संघर्ष समीति के नेतृत्व में इस परियोजना को निरस्त करने की मांग कर रहे स्थानीय नागरिकों ने पहले ही इस जन-सुनवाई के बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। इसके बावजूद 23 मई को देर शाम तक इस जन-सुनवाई को करवाने के लिए सरकार पूरे ताम-झाम से तैयारी कर रही थी यहां तक कि जिस गाँव में पानीशौचालयबिजली  आवागमन के साधन भी नहीं हैं वहां सरकार ने जनसुनवाई के लिए लाखों रूपए खर्च कर एक टेंट लगाया जिसमे कई शौचालयहाथ धोने के लिए वाश बेसिनपंखे यहां तक कि आला अधिकारियों के लिए कूलर लगे थे। यही नही, आम जनता के पैसे का दुरुपयोग करते हुए न्युक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (NPCIL) ने स्थानीय जनता को बहकाने के लिए मिठाइयां बांटी व दुष्प्रचार किया, लेकिन इसके बावजूद जनता चुटका परमाणु संयंत्र के खिलाफ अपने दृढ़ फैसले से नही डिगी। बरगी बांध द्वारा हुए विस्थापन और इसके खिलाफ लम्बे संघर्ष की चेतना से यहां के आदिवासी नागरिक यह समझ चुके हैं कि उनके संसाधनों को लूटने का सिलसिला सरकार कभी भी बंद नहीं करेगीक्योंकि  सरकार उनके लिए नहीं बल्कि मुट्ठी भर पूंजीपतियों और उनके विदेशी आकाओं के लिए काम करती है।  अगर बात सिर्फ आम जनता के लिए और अधिक बिजली उत्पादन की होती तो ढेरों अन्य सुरक्षित  प्राकृतिक विकल्प मौजूद है उनपर विचार किया जाता की विकसित देशों द्वारा नकारी जा चुकी परमाणु ऊर्जा पर।

     

    इसके अलावा, चुटका में जारी संघर्ष को मजबूत करने के लिए भोपाल और देश के अन्य हिस्सों से आए अनेक जन-संगठनों के साथियों पिछले एक हफ्ते से जबलपुर के कई हिस्सों और चुटका व आसपास के अनेक गांवों में नाभिकीय ऊर्जा के खतरों के बावजूद सरकार द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में जबरदस्ती थोपे जा रहे इस परमाणु संयंत्र के खिलाफ जनचेतना जागरण का व्यापक अभियान चलाया जा रहा था। आखिरकार लोगों के आक्रोश और बढ़ते प्रतिरोध से घबरा कर सरकार ने जन-सुनवाई को स्थगित करते हुए रातो-रात सुनवाई के तमाशे के लिए लगाए गए शामियाने को हटाने का काम शुरु कर दिया। सरकार के खिलाफ इस जीत से उत्साहित आस-पास के दो हजार आदिवासियों और अन्य साथियों ने 24 मई को विजय-रैली निकाली और जन-सभा कर के यह ऐलान कर दिया वो इस परमाणु संयंत्र को नही लगने देंगे। इस जन-सभा के माध्यम से लोगों ने अपनी निम्न मांगो को फिर से दुहरा कर सरकार को चेताया कि इन्हे लागू करे अन्यथा व्यापक आक्रोश के उभार को वह रोक नही पाएगी –

    1. चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना सहित अन्य सभी प्रस्तावित परियोजनाओं को तत्काल रद्द किया जाए;

    2. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर रोक लगाई जाए और सभी परमाणु संयंत्रों को बंद कर सुरक्षित तरीके से हटाया जाए;

    3. युरेनियम खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए;

    4. परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से संबंधित हर जानकारी को सार्वजनिक किया जाए

    5. वर्तमान ऊर्जा उत्पादन के अनावश्यक  विलासितापूर्ण उपभोग पर रोक लगाई जाए और ऊर्जा के समतामूलक वितरण  उपयोग की व्यवस्था की जाएऔर

    6. प्रदूषण-मुक्त ऊर्जा विकल्पों को बिना किसी भी तरह की मुनाफाखोरी या व्यवसायीकरण के जन-भागीदारीपूर्ण तरीकों से विकसित किया जाए।

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    चुटका परमाणु संघर्ष समीति; गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (म.प्र.); जन संघर्ष मोर्चा (म.प्र.); भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (म.प्र.); भारत की कम्युनिस्ट पार्टी – मार्क्सवादी-लेनिनवादी (म.प्र.); पीपल्स इनिशियेटिव अगेंस्ट न्युक्लियर पावर; ऑल इण्डिया स्टुडेंट्स फेडेरेशन (म.प्र.); क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा (म.प्र.);

    अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन (म.प्र.);

    गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन, भोपाल; मध्य प्रदेश महिला मंच; शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल;

    वुमेन अगेंस्ट सेक्शुअल वॉयलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन (म.प्र.)

     

    संपर्कः राजकुमार (चुटका) - 9424385139 विजय (भोपाल) - 9981773205, 

    लोकेश (भोपाल) - 9407549240

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