Here's is the link to melody :
http://www.youtube.com/watch?v=iugMErktJZk
--- On Sun, 21/6/09, Sameer Verma <svpost@...> wrote:
From: Sameer Verma <svpost@...>
Subject: Re: [gulzarfans] Gullal Music- what do u think about it
To: gulzarfans@yahoogroups.com
Date: Sunday, 21 June, 2009, 6:18 PM
A fabulous song by Gulzar saab... the composition by Vishal Bharadwaj and
voice of Sukhwinder Singh gel with the words so so well... Its too good a
song for a commercial.. . hats-off to Baja Allianz for weaving such a
wonderful song around its commercial..
Sameer
On 5/20/09, amol kadu <kadooamol@yahoo. com> wrote:
>
>
>
>
> Guys, i seriously feel that tho' it is unrelated to group, members shud
> check music of gullal -excellently penned by piyush mishra. I wud like 2
> hear yr comments on it. and if its possible what GULZAARSAAB thinks over it.
>
> Posting 2 of the songs lyrics here.
>
> the most radical lyrics i have heard in recent times
>
> amol
> shaher - piyush mishra
> एक वकत कि बात बताए एक वकत की
> जब शहर हमारा सो गयो थो वो रात
गजब की
> चहु ओर सब ओर दिशासे लाली
च्हायी रे
> जुगनी नाचे चुन्नर ओढे खून
नहायी रे
> सब ओरो गुल्लाल पुत गयो सब ओरो
मे
> सब ओरो गुल्लाल पुत गयो विपदा
च्हायी रे
> जिस रात शहर मे खुन की बारिस
आयी रे
> जिस रात गगन से खुन की बारिस
आयी रे
>
> सराबोर हो गया शहेर ओर सराबोर
हो गयि धरा
> सराबोर हो गयॊ रे जत्था
इन्सानो का बडा बडा
> सबही जगत ये पुछ्हे था जब इतना
सब कुच हो रह्यो थो
> तो शहर हमारा काय भाई सां आंख
मुन्द के सो रह्यो थो
> तो शहर ये बोल्यो निन्द गजब की
ऐसि आयि रे
> जिस रात शहर मे खुन की बारिस
आयी रे
> जिस रात गगन से खुन की बारिस
आयी रे...
>
> सन्नाटा विरानाखामोषी
अन्जानी
> जिन्दगि लेती है कर्वटे
तूफ़ानी
> घिरते हे साये घनेरे से
> रुखे बालोंको बिखेरे से
> बढ़ते है अँधेरे पिशाचो से
> काँपे है जी उनके नाचो से
> कही पे वो जूतों की खट ख़ट है
> कही पे तलवो की छटपट है
> कही पे हे झिगुर की आवाजे
> कही पे वो नलके की टप टप है
> कही पे वो काली सी खिड़की है
> कही वो अँधेरी सी चिमनी है
> कही हिलते पेडो का जत्थाहै
> कही कुछ मुंडेरों पे रखा हे
> रे रे रे हो
>
> सुन सान गली के नुक्कड़ पे जब
कोई कुत्ता
> चीख चीख के रोता है
> जब लैंप पोस्ट की गंदली पिली
घुप्प रौशनी में
> कुछ कुछ सा होता है
> जब कोई साया खुद को थोडा बचा
बचा कर
> गम सायो में खोता है
> जब पूल के खंभे को गाडी का
> गर्म उजाला धीमे धीमे धोता है
> तब शहर हमारा सोता हे
> तब शहर हमारा सोता हे
>
> जब शहर हमारा सोता है
> तब malum तुमको हाँ क्या क्या होता
है
> इधर जागती है लाशें, जिंदा हो
मुर्दा
> उधर जिंदगी खोता है
> इधर चीखती है वो दुआ
> खैराती उस अस्पताल में बिखरी
सी
> आँख में उसके अगले ही पल
> गरम मांस का नरम लोथडा होता है
> इधर उठी हर तकरारे
> जिस्मो के झटपट लेने देन में
> ऊँची सी
> उधर घाव से रिश्ते फूको
> दूर गुजरती आंखे देखे रुखी सी
> लेकिन उसको लेके रंग बिरंगी
> महलों में गुंजाईश होती है
> नशे में डुबे सेहन से
> खूंखार चुटकुलों की पैदाइश
होती है
> अध् नंगे जिस्मो की देखो
> लिपि पुती सी लगी नुमाइश होती
है
> लार टपकते चेहर को कुछ
> शेतानी करने की ख्वाइश होती है
> वो पूछे है हैरान होकर
> ऐसा सब कुछ होता है कब
> वो बतलाओ तो उनको
> ऐसा तब तब तब होता है
> जब शहर हमारा सोता है
> जब शहर हमारा सोता है
>
> Piyush Mishra Gulaal
>
> arambh- piyush mishra
>
> आरंभ है प्रचंड बोले मस्तको के
झुंड
> आज जंग की घडी की तुम गुहार दो
> आन बान शान या की जान का हो दान
> आज एक धनुष की बाण पे उतार दो
> मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो
प्राण ले
> वही तो एक सर्व शक्तिमान है
> इश्र की पुकार है ये भागवत का
सार है
> की युद्ध ही तो वीर का प्रमाण
है
> कौरवो की भीड़ हो या पांडवो का
नीर हो
> जो लड़ सका है वोही तो महान है
> जित की हवस नहीं किसीपे कोई वश
नहीं
> क्या ज़िन्दगी है ठोकरों पे
मार दो
> मौत अंत है नहीं तो मौत से भी
क्यों डरे
> ये जाके आसमान में दहाड़ दो
> हो दया का भाव या की शौर्य का
चुनाव
> या की हार का वो घाव तुम भी सोच
लो
> या की पूरे भाल भर जला रहे विजय
का लाल
> लाल ये गुलाल तुम ये सोच लो
> रंग केसरी हो या मृदंग केसरी हो
या की
> केसरी हो लाल तुम ये सोच लो
> जिस कवी की कल्पना में जिंदगी
हो प्रेम गीत
> उस कवी को आज तुम नकार दो
> भीगती नसों में आज phoolati रगों में
आज
> aag की लपट का तुम baghaar do
> आरंभ है प्रचंड बोले मस्तको के
झुंड
> आज जंग की घडी की तुम गुहार दो
> आन बान शान या की जान का हो दान
> आज एक धनुष की बाण पे उतार दो
>
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