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13370
" माया" शà¥à¤°à¥à¤à¤
" माया" श्रृंखला -१( कुछ मुक्तक) १- माया के माया-महल में, सत्य भी...
ramadwivedi
Jun 5, 2007 5:26 am
13371
गीतफरोश
मित्रों हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार स्व, पं भवानीप्रसाद...
katare_nityagopal
katare_nitya...
Jun 5, 2007 5:26 am
13372
à¤à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¨
आप सभी को मेरा सादर-नमन। काफ़ी समय से मै अनुभूति-हिन्दी से दूर...
sunita sharma
shanoo03
Jun 5, 2007 5:27 am
13373
Re: " माया" शà¥à¤°à¥
दुर्योधन की एक फिसलन , कुरुक्षेत्र भी रच जाते हैं॥ वाह क्या...
Renu Ahuja
renu_poetry
Jun 7, 2007 4:59 am
13374
Re: [anubhuti-hindi] रेणू ज
रेणू जी, आपकी इस पारखी नज़र को नमन करती हूं.....स्नेह बनाए ...
rama dwivedi
ramadwivedi
Jun 8, 2007 5:25 am
13375
Re: रà¥à¤£à¥ à¤à¥, &qu
-- रेणू जी, आपकी इस पारखी नज़र को नमन करती हूं.....स्नेह बनाए...
ramadwivedi
Jun 8, 2007 6:17 am
13376
पतà¤à¤ à¤à¥ डà¥à¤°
कृपया मेरी इस कविता को अन्यथा ना लें यह किसी व्यक्ति विशेष पर...
sunita sharma
shanoo03
Jun 11, 2007 4:45 am
13377
From : L
http://sarathi.info/ <http://sarathi.info/> --- From : http://antarman-antarman.blogspot.com/2007/05/blog-post_10.html ...
lavanyashah
Jun 11, 2007 4:46 am
13378
नजर हो चुकी है सन्यासी
ॠष्यमूक पर बैठे बैठे हमने सारी उमर गँवा दी किन्तु न आया राह...
Rakesh Khandelwal
rakesh518
Jun 12, 2007 4:50 am
13379
Re: पतंग की डोर
Sunder abhivyakti, asardaar shabd, ek achhi kavita. badhai. sunita sharma <shanoo03@...> wrote: कृपया मेरी इस कविता...
Vijendra S. Vij
anartistpalette
Jun 12, 2007 4:51 am
13380
वैसे तो मुझको पसंद नहीं
वैसे तो मुझको पसंद नहीं: जब चाँद गगन में होता है या तारे नभ में...
Sameer Lal
sameerlal_1
Jun 13, 2007 5:50 am
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Re: वैसे तो मुझको पसंद नहीं
समीर भाई: हमेशा की तरहा इस बार भी बहुत खूब लिखा है आपने.... पीने...
Akash
cintired1964
Jun 14, 2007 5:15 am
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मीडिया की पड़ताल करने वाल
मित्रो, मीडिया के विभिन्न घटकों पर गंभीर पड़ताल की पत्रिका...
jayprakash manas
rath_jayprakash
Jun 16, 2007 5:47 am
13383
इसीलिये मैं मौन रह गया
एक तुम्हारा प्रश्न अधूरा, दूजे उत्तर जटिल बहुत था तीजे रुंधी...
Rakesh Khandelwal
rakesh518
Jun 21, 2007 9:57 pm
13384
A TRIBUTE TO SHIRDEE SAI BABA
वॉइस ऑफ़ इंडिया आभास जोशी<http://billoresblog.blogspot.com/2007/05/blog-post_29.html> ...
girish billore
wcd_jab
Jun 25, 2007 12:28 pm
13385
उंगलियां और आप
उंगलियों ने मेरी थाम ली तूलिका, चित्र बनने लगे हर दिशा आपके ...
Rakesh Khandelwal
rakesh518
Jun 25, 2007 12:28 pm
13386
Re: -- राà¤à¥à¤¶ à¤à¥,
-- राकेश जी, नवीन उपमानों से विभूषित यह गीत मर्म को बखूबी छू...
ramadwivedi
Jun 25, 2007 12:28 pm
13387
Re: इसीलिये मैं मौन रह गया
बहुत खूब राकेश भाई!! लेकिन पिया घुटी में जो था, उसका कुछ प्रभाव...
Sameer Lal
sameerlal_1
Jun 25, 2007 12:30 pm
13388
बस घटा रो गई
ताल पर धड़कनों की नहीं बज सकीं सांस की सरगमें लग रहा सो गईं ...
Rakesh Khandelwal
rakesh518
Jun 26, 2007 4:28 am
13389
Re: इसीलिये मैं मौन रह गया
a great one indeed ! thak chuka, haar gaya, jeevan ke us paar gaya, bat anokhi re maanav teri, tu itna kuchh ek saath sahay gaya ! Sprem Pankaj Sameer Lal...
Pankaj Kohli
pankajkohli_in
Jun 26, 2007 4:28 am
13390
"माया" शà¥à¤°à¥à¤à¤à¤
"माया" श्रृंखला- २(कुछ मुक्तक) १- भक्तों के माया-दान से, ...
ramadwivedi
Jun 26, 2007 4:28 am
13391
पहली बार अपनी पंक्तियाँ क
(एक पुराना मुक्तक आप लोगों से बाँट रही हूँ ) समय के साथ यादों...
Kavita Vachaknavee
kvachaknavee
Jun 28, 2007 3:20 am
13392
आज के लिये यह अन्तिम
जगत् के सँगमरमर में हजारों फूल बोये हैं पलक-ल से कमल-ल...
Kavita Vachaknavee
kvachaknavee
Jun 28, 2007 3:20 am
13393
उसी क्रम में २ और मुक्तक
(१) यहीं सब मिल - बिछुड़ना , रूठ- मनना छोड़ जायेंगे तुम्हारी दर...
Kavita Vachaknavee
kvachaknavee
Jun 28, 2007 3:20 am
13394
त्रुटि सुधार
सम्मान्य अनूप जी ! (एवम इस परिवार से जुड़े हुए सभी बन्धुओं )! ...
Kavita Vachaknavee
kvachaknavee
Jun 28, 2007 3:21 am
13395
दरà¥à¤¦ à¤à¤¾ रिशà¥à¤
तेरा मेरा रिश्ता, लगता है जैसे... है दर्द का रिश्ता, हर खुशी में...
sunita sharma
shanoo03
Jun 28, 2007 3:22 am
13396
Re: त्रुटि सुधार
अनुभूति नई हवा मे स्वागत है आपका.. चारो मुक्तक सुन्दर लगे.. ...
Vijendra S. Vij
anartistpalette
Jun 28, 2007 5:23 am
13397
Re: आज के लिये यह अन्तिम
अदभुत.. Kavita Vachaknavee <kvachaknavee@...> wrote: जगत् के सँगमरमर में हजारों फूल...
Vijendra S. Vij
anartistpalette
Jun 28, 2007 5:23 am
13398
Re: आज के लिये यह अन्तिम
धन्यवाद, इस सराहना के लिये। आभारी हूँ । "Vijendra S. Vij" <anartistpalette@...> wrote: ...
Kavita Vachaknavee
kvachaknavee
Jun 28, 2007 6:52 am
13399
" घर " शीर्षक रचनाएँ
अपनी पुस्तक "मैं चल तो दूँ " से कुछ रचनाएँ (२००५) ++ घर : दस...
Kavita Vachaknavee
kvachaknavee
Jun 28, 2007 12:25 pm