जेठ बुलाए
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उड़ती धूप
कटी-कटी धूप
गुड़-गुड़ करती
बाबा के हुक्के की मूँज
जेठ दुपहरी
छाँव तले गिलहरी
किट-किट करती
अम्मा की सुपारी दिन सून
लम्बे दिन
लम्बी तारीखें
"ंधे मुँह ऊँघती
जीजी की किताबें, परचून
गुम हवा
झुलसी धरा
मेढ़ पर सोचती
उसकी आँखें लगी, सब सून